1. सदाचरण क्या है? - Page 386

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कर झूठ बोलता है या (ii) वह एक चुगलखोर हो सकता है। यहाँ सुनी और वहां जाकर कह दी जिससे कि लोगों के बीच कानों सुनी बातों से झगड़ा हो सके, या वहाँ सुनी और यहाँ कह दी ताकि वहाँ के लोगों और यहां के लोगों में झगड़ा हो जाए। वह शांति को समाप्त करनेवाला और अशांति को उकसाने वाला है। मतभेद उसके कथनों को प्रेरित करते हैं, मतभेद करना उसका आनंद, उसकी प्रसन्नता और उसका सुख है। या (iii) वह जबान का कड़वा हो सकता है_ जो कुछ वह कहता है वह कठोर और अप्रिय होता है, दूसरों के लिये दुखदायी और दिलों को जख्मी करने वाला क्रोध को उत्तेजित करने वाला और चित-विक्षेप की ओर ले जाने वाला है। या (iv) वह एक गप्पी हो सकता है_ बेमौ के बात करने वाला, तथ्यों पर बिना ध्यान दिये, सदैव हानिकारक बातें करने वाला, कभी धर्म की बात न करने वाला, कभी नीति की बात न करने वाला, किन्तु सदैव तुच्छ, असामयिक, क्षुद्र, निष्प्रयोजन और हानिकारक बातें करने वाला होता है।’’

  1. ‘‘जहां तक मन के दुराचरण का संबंध है, एक मनुष्य (i) लोभी हो सकता है, दूसरे लोगों की सम्पत्ति उसी की हो इस प्रकार वह इच्छा कर सकता है या (ii) वह द्वेषी तथा हृदय से दुष्ट हो सकता है, वह यह इच्छा कर सकता है कि उसके आस-पास के प्राणी मर जायें, नष्ट हो जायें, मिट जायें, या किसी तरह न रहें। या (iii) वह मित्या-दृष्टि तथा अवधारणाओं में भ्रान्तिपूर्ण हो सकता है। वह सोच सकता है कि ऐसी कोई चीज नहीं है जैसे कि दान या त्याग या समर्पण, कि ऐसी चीज नहीं है जैसे कि शुभ और अशुभ कर्मों के फल और परिणाम, कि ऐसी कोई चीज नहीं है जैसे कि यह लोक या परलोक, कि ऐसी कोई चीज नहीं है जैसे कि माता-पिता या और कई सगे-सम्बन्धी, कि संसार में ऐसी कोई चीज नहीं है जैसे कि श्रमण और ब्राह्मण जिन्होंने, सम्यक्, मार्ग बहुगत किया है और उस पर स्वयं ठीक से चलें तथा इस लोक व परलोकों को समझा और स्पष्ट अनुभव किया और यह सम्पूर्ण रूप से दूसरों को भी कराया।’’

  2. ‘‘इसके विपरीत शरीर के तीन सदाचरण और तीन मन के सदाचरण हैं।’’

  3. ‘‘जहाँ तक शारीरिक सदाचरण का सम्बन्ध है, एक मनुष्य (i) सभी जीव-हत्याओं से दूर रहता है और किसी भी प्राणी की हत्या से विरत रहता है_ दण्ड और तलवार को एक ओर रखकर, वह निष्कपटता और दयालुता से पूर्ण होता है, प्रत्येक सजीव प्राणी के लिये करुणा और अनुकम्पा से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करता है। (ii) चोरी को वह स्वयं से दूर रखता है और दूसरों की किसी ऐसी