10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
5. महामाया का निधन
- पांचवे दिन नामकरण संस्कार किया गया। बालक का नाम सिद्धार्थ रखा गया।
उसके गोत्र का नाम गौतम था। इसलिए वह सिद्धार्थ गौतम (पालि में गोतम)
के नाम से विख्यात हुआ।
- बालक के जन्म के आनंदोत्सव और नामकरण संस्कार के दौरान ही महामाया
अचानक बीमार पड़ गई और उसकी बीमारी ने गंभीर रूप धारण कर लिया।
- अपना अंत समय निकट आया जानकर उसने शुद्धोदन और प्रजापति को अपनी
शय्या के पास बुलाया और कहाः- ‘‘मुझे विश्वास है कि मेरे बच्चे के बारे
में असित द्वारा की गई भविष्यवाणी सच होगी। मुझे दुःख है कि मैं इसे पूरा
होते नहीं देख पाऊंगी।’’
- ‘‘मेरा बच्चा शीघ्र ही मातृविहीन हो जाएगा। लेकिन इसकी मुझे तनिक भी चिंता
नहीं है कि मेरे बाद इसकी देखभाल, पालन-पोषण उसके भविष्य के अनुरूप
होगा कि नहीं।’’
- ‘‘प्रजापति! मैं अपना बच्चा तुम्हें सौंपती हूं, मुझे इसमें किंचित भी संदेह नहीं
है कि तुम उसके लिए मुझ से भी बढ़कर होगी।’’
- ‘‘अब चिंता न हो। मुझे मरने दो। यमराज का बुलावा आ गया है और उनके
दूत मुझे ले जाने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’ ऐसा कहते-कहते महामाया ने
अंतिम सांस ली। शुद्धोदन और प्रजापति दोनों बहुत दुःखी हुए और फूट-फूट
कर रोने लगे।
जब उसकी मां का निधन हुआ सिद्धार्थ केवल सात दिन का था।
सिद्धार्थ का एक छोटा भाई था, जिसका नाम नंद था। वह महाप्रजापति से
उत्पन्न शुद्धोदन का पुत्र था।
- उसके बहुत से चचेरे भाई भी थे। महानाम और अनुरुद्ध चाचा शुक्लोदन के
पुत्र थे तथा आनंद चाचा अमितोदन के। देवदत्त उसकी बुआ अमिता का पुत्र
था। महानाम सिद्धार्थ से बड़ा था और आनंद छोटा था।
- सिद्धार्थ उनके साथ खेलता-खाता बड़ा हुआ।