4. सदाचरण में सम्पूर्णता कैसे प्राप्त की जाए? - Page 391

362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘बिल्कुल नहीं।’’

  2. ‘‘या यदि उसके परिचित व सम्बन्धी या उसके अतिथि उसकी ओर से निवेदन

करें?’’

  1. ‘‘बिल्कुल नहीं।’’

  2. ‘‘या उसके मृत-पितरों ने भी उसकी वकालत की हो कि इसने देवताओं को

बलि देने के लिए या उसको राजा को कर देने के आधार पर उसकी ओर से

निवेदन करें?’’

  1. ‘‘बिल्कुल नहीं।’’

  2. ‘‘यदि स्वयं अपनी ओर से निवेदन करे या उसके लिये दूसरे निवेदन करें कि

उसने मांस और दूध के अपने भोजन की चिन्ता करने के कारण सदाचरण और

औचित्य का मार्ग छोड़ा है, तो क्या यह उसके लिये लाभप्रद होगा?’’ 26. ‘‘नहीं।’’

  1. ‘‘धनंजानी तुम क्या सोचते हो? कौन श्रेष्ठ मनुष्य है? वह जो अपने माता-पिता

के कारण सदाचरण और औचित्य का मार्ग छोड़ देता है या वह जो उनकी

कुछ भी परवाह न कर सदाचरण और औचित्य के मार्ग पर चलता है।’’ 28. धनंजानी ने उत्तर दिया-‘‘दूसरा, क्योंकि सदाचरण और औचित्य के मार्ग पर

चलना उससे हट जाने से बेहतर है।’’

  1. ‘‘इसके अतिरिक्त, धनंजानी ऐसे दूसरे रास्ते भी हैं, जो स्वयं में न्यायोचित और

सदाचारी हैं, जिनके द्वारा वह अपने माता-पिता का भरण-पोषण कर सकता है

और फिर भी बुरा करने से बच सकता है, और ईमानदारी से चल सकता है।

अब, क्या यही शर्त पत्नी, परिवार और शेष सभी लोगों पर लागू नहीं होती

है?’’

  1. ‘‘यह होती है, सारिपुत्त।’’

  2. इस पर सारिपुत्त के कथन से प्रसन्न होकर ब्राह्मण ने उनको धन्यवाद दिया और

वह उठकर अपने मार्ग पर चला गया।

4. सदाचरण में सम्पूर्णता कैसे प्राप्त की जाए?

  1. एक बार जब भगवान बुद्ध श्रावस्ती में जेतवनाराम में ठहरे हुए थे, तब उनके

पास पाँच सौ उपासक आये। उनमें से एक का नाम धम्मिक था।