1. निर्वाण क्या है? - Page 395

366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

परिच्छेद - चार

निर्वाण सम्बन्धी प्रवचन

1. निर्वाण क्या है?

  1. एक बार तथागत श्रावस्ती में अनाथपिण्डिक के जेतवनाराम में ठहरे हुए थे,

सारिपुत्र भी वहीं ठहरे हुए थे।

  1. तथागत ने भिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए कहा, ‘‘भिक्षुओं! तुम सांसारिक

वस्तुओं के दायात (उत्तराधिकारी) मत बनो, बल्कि मेरे धम्म के बनो, क्योंकि

मेरे मन में तुम सभी के लिये अनुकम्पा है। इसलिए मैं तुम्हें यह कहता हूँ।’’ 3. इस प्रकार बोलकर तथागत उठे और व्याख्या कर अपनी कुटी में चले गये। 4. सारिपुत्र पीछे रह गये। तब भिक्षुओं ने उनसे निवेदन किया कि वे बताएँ कि

निर्वाण क्या हैं?

  1. तब सारिपुत्र ने भिक्षुओं के प्रत्युत्तर में कहा, ‘‘भिक्षुओ! तुम जानते हो कि

लोभ अकुशल-धर्म है और द्वेष अकुशल-धर्म है।’’

  1. ‘‘इस लोभ और विद्वेष से अलग होने के लिये मध्यम-मार्ग है, जो हमें देखने

के लिये आँखे देता है और हमें ज्ञान करवाता है, तथा हमें शान्ति, प्रज्ञा, बोधि

और निर्वाण की ओर ले जाने वाला है।’’

  1. ‘‘यह मध्यम-मार्ग क्या हैं? यह और कुछ नहीं, बल्कि सम्यक्-दृष्टि,

सम्यक्-संकल्प, सम्यक्-वाणी, सम्यक्-आजीविका, सम्यक्-व्यायाम,

सम्यक्-स्मृति, सम्यक्-समाधि ही आर्य आष्टांगिक मार्ग है। भिक्षुओ! यही

मध्यम-मार्ग है।’’

  1. ‘‘हाँ’’, भिक्षुओ! क्रोध घृणित धर्म है और विद्वेष घृणित धर्म है, ईर्ष्या और जलन

घृणित धर्म हैं, कृपणता और धनलोलुपता घृणित धर्म हैं, और ढोंग, धोखा और

घमण्ड घृणित धर्म हैं, गर्व घृणित धर्म और प्रमाद घृणित धर्म है।’’ 9. ‘‘गर्व और प्रमाद से अलग होने के लिये मध्यम-मार्ग है - यह देखने के लिये

आँखें देने वाला हैं, हमें ज्ञान करवाने वाला है और हमें शान्ति, प्रज्ञा और बोधि

की ओर ले जाने वाला है।’’

  1. ‘‘निर्वाण और कुछ नहीं, बल्कि वही आर्य आष्टांगिक मार्ग हैं।’’
  2. इस प्रकार भदन्त सारिपुत्र ने कहा तो मन से प्रसन्न भिक्षुओं ने आनन्दित हो

उनका अनुमोदन किया।