370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- तब भदन्त सारिपुत्र शाम की ध्यानावस्था से उठकर भदन्त महाकाश्यप के पास
गए और एक ओर बैठ गए।
- इस प्रकार बैठे हुए भदन्त सारिपुत्र ने भदन्त महाकाश्यप से कहा, ‘‘आप तथागत
मरणोपरान्त रहते हैं?
- ‘‘मित्र! तथागत द्वारा यह अव्याकृत है कि तथागत मरणोपरान्त रहते हैं।’’
- ‘‘तब क्या मित्र? क्या तथागत मरणोपरान्त रहते हैं और नहीं भी रहते हैं अर्थात्
दोनों हैं?’’
‘‘यह भी, मित्र! तथागत द्वारा अव्याकृत है।’’
‘‘तब कैसे, मित्र! क्या तथागत मरणोपरान्त नहीं भी रहते हैं? यह भी मित्र!
तथागत द्वारा व्याकृत नहीं किया गया है।’’
- मित्र! किंतु यह तथागत द्वारा व्याकृत क्यों नहीं किया गया है?
- ‘‘यह एक ऐसा प्रश्न है, जिसका संबंध मानवता के साथ या पवित्र-जीवन के मूल
सिद्धांतों से नहीं है। यह न तो प्रज्ञा की प्राप्ति और न ही निर्वाण की ओर ले जाता
है। मित्र! यही कारण है कि यह तथागत द्वारा व्याकृत नहीं किया गया है।’’
3. ईश्वर से प्रार्थनाएं और याचनाएं करना व्यर्थ
- एक बार भगवान बुद्ध ने वासेट्ठ से बातचीत करते हुए कहाः-
- ‘‘यदि वह अचिरवती नदी पानी से किनारे तक लबालब भरी उमड़ रही हो, और
एक मनुष्य जिसके इसके दूसरे किनारे पर कार्य हो और पार करना चाहे।’’ 3. ‘‘और किनारे खड़े होकर, वह दूसरे किनारे को याचना करे और कहे, ‘‘हे
उधर के किनारे! इधर आओ, इस ओर आओ!’’
- ‘‘अब क्या तुम जानते हो? वासेट्ठ! अचिरवती नदी का दूसरा किनारा उस
मनुष्य के आह्वान करने से, प्रार्थना करने से, आशा करने से और स्तुति करने
से क्या इस ओर चला आयेगा?’’
- ‘‘ठीक इसी तरह से, वासेट्ठ! क्या तीन वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण, उन गुणों को
पालन को छोड़कर, जो वास्तव में एक मनुष्य को सच्चा ब्राह्मण बनाते हैं, और
उन दुर्गुणों के पालन को स्वीकार कर जो वास्तव में मनुष्यों को अब्राह्मण बनाते
हैं,’’ इस प्रकार कहेंः
- ‘‘इन्द्र! हम तेरा आह्वान करते हैं, ब्रह्म हम तेरा आह्वान करते हैं ईशान, हम
तेरा आह्वान करते हैं, प्रजापति हम तेरा आह्वान करते हैं, ब्रह्म हम तेरा आह्वान
करते हैं, हम आह्वान करते हैं।’’