5. भोजन नहीं, कुशल कर्मों का महत्त्व है - Page 402

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  1. ‘‘मैं इसका अर्थ आपसे जानना चाहता हूँ, आपका ‘आम-गन्ध’ किस प्रकार

का है?’’

  1. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘जीव हिंसा करना, पीटना, काटना, बाँधना, चुराना, झूठ

बोलना, ठगना, धोखा देना, निरर्थक ज्ञान, व्यभिचार_ ये ‘आम-गन्ध’ है, माँस

खाना नहीं।

  1. ‘‘इस संसार में जो मनुष्य इन्द्रियजनित काम-भोगों के असंयत हैं, जो मधुर

वस्तुओं के लालची हैं, जो अपवित्र कर्मों से सम्बन्धित हैं, जो मिथ्या दृष्टि के

हैं, धूर्त, अनुसरण करने में कठिन हैं_ ये ‘आम-गन्ध’ हैं, माँस खाना नहीं।’’

  1. ‘‘इस संसार में जो क्रूर, कठोर, चुगलखोर, विश्वासघाती, निष्ठुर, अत्यधिक

अहंकारी और अनुदार हैं, तथा किसी को कुछ भी नहीं देते हैं, ये ‘आम-गन्ध’

हैं, माँस खाना नहीं।’’

  1. ‘‘क्रोध, अभिमान, हठ, विरोध, ठगी, ईर्ष्या, डींग मारना, अत्यधिक अहंभाव,

कुकर्मी से संबंध_ ये ‘आम-गंध’ हैं, माँस खाना नहीं।’’

  1. ‘‘जो दुश्शील के हैं, अपने ऋण को चुकाने से मना करते हैं, झूठी निंदा करने

वाले हैं, अपने व्यवहार में कपटी हैं, धोखेबाज हैं, वे जो इस संसार में मनुष्यों

में निकृष्टतम हैं, ऐसे कुकर्म करते हैं, ये ‘आम-गन्ध’ हैं और माँस खाना

नहीं।’’

  1. इस संसार में जो मनुष्य सजीव प्राणियों के प्रति असंयत हैं, जो दूसरों को संकट

पहुँचाने पर, उनकी वस्तुयें छीन लेने पर तुले हैं_ अनैतिक, क्रूर, कठोर और

अशिष्ट हैं, ये ‘आम-गन्ध’ हैं, माँस खाना नहीं।

  1. ‘‘वे जो इन सजीव प्राणियों पर आक्रमण करते हैं या तो लोभ या द्वेष वश,

और सदैव बुरा करने पर तुले रहते हैं, वे मरणोपरान्त अन्धकार में चले जाते हैं

और सिर के बल नरक में गिरते हैं_ ये ‘आम-गन्ध’ हैं, माँस खाना नहीं।’’

  1. ‘‘मछली-माँस से विरत रहने से, न नग्नता से, न सिर मुँडाने से, न जटा जैसे

केश रखने से, न भभूत रमाने से, न खुरदरी मृग-छाल धारण करने से, न यज्ञाग्नि

की पूजा करने से, न ही अमृत प्राप्ति के निमित्त तमाम तपस्याएं करने से, न

बलियों के देने से, न मंत्र जाप से यज्ञों से और न ही भिन्न-भिन्न यज्ञ करने

से वह मनुष्य शुद्ध हो सकता है, जिनके अपने संदेह दूर नहीं हुए हैं।’’

  1. ‘‘वह जो संयतेन्द्रिय और विजितेन्द्रिय जीवन व्यतीत करता हुआ धम्म में स्थित

है, जिसे सच्चाई और शीलपालन में आनन्द होता है, जो आसक्ति से परे जा

चुका है और सभी दुखों को पराजित कर चुका है_ वह बुद्धिमान मनुष्य जो