3. राजनैतिक और सामरिक शक्ति सामाजिक व्यवस्था पर निर्भर करती है - Page 407

378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘तब उनसे कहना कि मगध राजा वैदेही-पुत्र अजातशत्रु, वज्जियों पर आक्रमण

करना चाहता है। उनका कहना है कि भले ही वे कितने ही शक्तिशाली और

ताकतवर हों, मैं इन वज्जियों को नष्ट कर डालूँगा, और वज्जियों को सर्वनाश

तक पहुँचा दूँगा।’’

  1. ‘‘और जो कुछ भी तथागत भविष्यवाणी करें, उसे ध्यानपूर्वक मन में रखना

और मेरे सामने दोहराना, क्योंकि बुद्ध कुछ भी असत्य नहीं बोलते हैं।’’ 7. तब वर्षकार ब्राह्मण राजा के वचनों को सुनकर बोला, ‘‘वैसे ही होगा जैसा

आप कहते हैं।’’ और राजश्री रथों को तैयार कराकर, वह गृध्रकूट पर्वत गया। 8. तब वहाँ पहुँचने पर उसने तथागत से अभिवादनों और कुशल-समाचारों का

आदान-प्रदान किया और तब उन्हें सन्देश दिया, जैसा कि राजा ने आदेश दिया

था।

  1. उस समय भदन्त आनन्द तथागत के पीछे खड़े थे, और तथागत ने उनसे कहा,

‘‘क्या तुमने सुना है, आनन्द! कि वज्जीगण पूर्णरूप से प्रायः सार्वजनिक सभाओं

की बैठक करते रहते हैं।’’

  1. ‘‘भगवान्! मैंने सुना है, ऐसा है,’’ उन्होंने उत्तर दिया।

  2. तब तथागत ने कहा, ‘‘जब तक आनन्द! इसी तरह वज्जी इन परिपूर्ण और

प्रायः सार्वजनिक सभाओं की बैठक करते रहेंगे, तब तक उन्हें पतन की आशा

नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्नति ही होगी।’’

  1. ‘‘आनन्द! जब तक इसी तरह वज्जीगण मिल-जुलकर एक साथ मिलेंगे, और

मिल-जुलकर उठेंगे और अपने निर्णयों को मिलकर कार्यरूप में परिणत करेंगे,

तब तक उनके पतन की आशा नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनकी उन्नति

होगी?’’

  1. ‘‘आनन्द! जब तक इसी तरह वे पूर्व निश्चित नियम के बिना कोई कार्यवाही नहीं

करेंगे, जो पूर्व में नियम बन चुके हैं किसी भी तरह उनका उल्लंघन नहीं करेंगे

और पुराने समय से चली आई वज्जियों की परम्परा के अनुरूप कार्य करेंगे, तब

तक उनके पतन की आशा नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनकी उन्नति होगी।’’ 14. ‘‘जब तक इसी तरह वे ज्येष्ठ वज्जिओं का आदर-सम्मान, सत्कार और सहायता

करते रहेंगे, और उनके वचनों को महत्व देते रहेंगे, तब तक उनके पतन की

आशा नहीं करनी चाहिए बलिक उनकी उन्नति होगी।’’

  1. ‘‘जब तक वज्जी किसी स्त्री या लड़की को अपमान से बलपूर्वक या अपहरण