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करके अपने घर लाकर नहीं रखेंगे, तब तक उनके पतन की आशा नहीं करनी

चाहिए, बल्कि उनकी उन्नति होगी। ’’

  1. ‘‘जब तक इसी तरह वज्जीगण धर्म का आदर और अनुसरण करते रहेंगे, तब

तक उनके पतन की आशा नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनकी उन्नति होगी।’’ 17. ‘‘आनन्द! जब तक वज्जिगण ये बातें करते रहेंगे, तब तक उन्हें पतन की आशा

नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्नति ही होगी और कोई उनका नाश नहीं कर

सकता।’’

  1. संक्षेप में, भगवान बुद्ध ने घोषित किया कि जब तक इसी तरह वज्जीगण

प्रजातन्त्र में विश्वास करते रहेंगे और प्रजातन्त्र का पालन करते रहेंगे, तब तक

उनके राज्य को कोई खतरा नहीं।

  1. तब तथागत ने वर्षकार को सम्बोधित किया और कहाः

  2. ‘‘हे ब्राह्मण! जब मैं एक बार वैशाली में ठहरा हुआ था, तब मैंने वज्जियों को

कल्याण की ये बातें सिखलाई थीं।’’

  1. ब्राह्मण ने उत्तर दिया, ‘‘जब तक इसी तरह वे बातों का पालन करते रहेंगे, तब

तक हम वज्जियों के कल्याण की आशा कर सकते हैं न कि उनके पतन की।

अतः वज्जीगण मगध के राजा द्वारा पराजित नहीं हो सकते।’’ 22. इस प्रकार वर्षकार ने तथागत के वचनों को सुना, अपने आसन से उठा और

राजगृह वापस लौटकर मगध-सम्राट को वह सब कह सुनाया जो उसने तथागत

से सुना था।

4. युद्ध अनुचित है

  1. ऐसा हुआ कि मगध के राजा अजातशत्रु ने घुड़सवारों और पैदलों की एक सेना

एकत्रित कर, राजा प्रसेनजित् के राज्य के एक भाग काशी पर आक्रमण कर

दिया और आक्रमण की सूचना पाकर प्रसेनजित् ने भी उसी समय एक सेना

एकत्रित की और उसका मुकाबला करने के लिए गया।

  1. वे दोनों एक दूसरे से लड़े और अजातशत्रु ने राजा प्रसेनजित् को पराजित कर

दिया, प्रसेनजित् अपनी राजधानी श्रावस्ती को वापस लौट गया। 3. जो भिक्षु श्रावस्ती से भिक्षाटन करके लौट रहे थे, उन्होंने आकर तथागत को

युद्ध से हारकर प्रसेनजित् के पीछे वापस लौटने के विषय में बताया। 4. ‘‘भिक्षुओ! मगध का राजा अजातशत्रु अकुशल पथ पक्ष का साथी है।