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- ‘‘एक भिक्षु, जो चिन्तन में आनन्दित रहता है, जो प्रमाद को भय की दृष्टि से
देखता है, जो (अपनी आदर्श स्थिति से) पतित नहीं हो सकता है-वह निर्वाण
के समीप ही है।’’
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव बुद्ध पर केन्द्रित रहते हैं।
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव संघ पर केन्द्रित रहते हैं।
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव धम्म पर केन्द्रित रहते हैं।
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव उनके शरीर पर केन्द्रित रहते हैं।
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव करुणा (अहिंसा) पर केन्द्रित रहते हैं।
- गौतम (बुद्ध) के श्रावक सदैव जागरूक रहते हैं, और उनके विचार दिन और
रात सदैव ध्यान (भावना) पर केन्द्रित रहते हैं।
- एक भिक्षु बनने के लिये संसार को त्यागना कठिन है, संसार का भोग करना
कठिन है, विहार भी दुष्कर है, घर भी कष्टकर है, प्रत्येक वस्तु को सामूहिक
रूप से बाँटकर प्रयोग में लाने वाले समान लोगों के साथ निवास करना भी
कष्टप्रद है, और प्रव्रजित (भिक्षुका) जीवन भी कष्टप्रद है। 31. जो मनुष्य श्रद्धायुक्त है, शील और यश से सम्पन्न है, वह जहाँ-जहाँ भी जाता
है हर जगह आदर पाता है।
2. भिक्षु और तपस्वी
क्या भिक्षु तपस्वी होता है? उत्तर नकारात्मक में है।
यह स्वयं तथागत ने यह नकारात्मक उत्तर निग्रोध परिव्राजक के साथ बातचीत
करते हुए दिया था।
- एक बार तथागत राजगृह के समीप गृध्रकूट पर्वत पर ठहरे हुए थे। उसी समय
रानी उदुम्बरिक के उद्यान में बहुत से परिव्राजकों के साथ निग्रोध परिव्राजक
रह रहा था।
- उस समय तथागत गृध्रकूट पर्वत से उतरते हुए सुमगधा नदी के तट पर मोरों