14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
ठहराता था-‘‘जब हम जीवित प्राणियों के बारे में सोचते हैं, तो हम भेद-विभेद
करना शुरू कर देते हैं। हम मित्रों को शत्रुओं से अलग कर लेते हैं, हम पालतू
जानवरों को मनुष्यों से अलग कर लेते हैं। हम मित्रों और पालतू जानवरों से
प्यार करते हैं और शत्रुओं व जंगली जानवरों से घृणा करते हैं।’’
- ‘‘हमें इस विभाजन-रेखा की सीमा अवश्य लांघनी चाहिए और ऐसा हम तभी
कर सकते हैं, जब हम अपने ध्यान में व्यावहारिक जीवन की सीमाओं से ऊपर
उठ सकें।’’ ऐसा उसका तर्क था।
अत्यधिक कारुणिक होना बचपन से ही उसकी प्रवृत्ति थी।
एक बार वह अपने पिता के खेतों पर गया। विश्राम के समय वृक्ष के नीचे वह
प्राकृतिक शांति और सुन्दरता का आनंद ले रहा था। जब वह बैठा था, आकाश
से एक पक्षी ठीक उसके सामने आ गिरा।
- पक्षी एक तीर से घायल था, जो उसके शरीर में बिंधा हुआ था और जिसके
कारण वह पीड़ा से छटपटा रहा था।
- सिद्धार्थ पक्षी की सहायता के लिए दौड़ा। उसने तीर निकाला, घाव पर पट्टी
बाँधी और पीने के लिए उसे पानी दिया। उसने पक्षी को उठाया,जहाँ बैठा था
वहाँ गया, अपनी चादर से पक्षी को लपेट लिया और उसे गर्मी देने के लिए
छाती से लगा लिया।
- सिद्धार्थ को आश्चर्य हो रहा था कि इस निर्दोष पक्षी पर तीर किसने चलाया
होगा। शिकार के सभी हथियारों से सुसज्जित उसका फुफेरा भाई देवदत्त वहाँ
जल्दी ही आया। उसने सिद्धार्थ से कहा कि उसने आकाश में उड़ते एक पक्षी
को तीर मारा है, पक्षी कुछ दूरी पर उड़ा फिर गिर गया। उसने पूछा ‘‘क्या
तुमने उसे देखा है’’?
- सिद्धार्थ ने ‘हाँ’ में उत्तर दिया और उसने पक्षी दिखाया, जो अब तक पूर्णतः
स्वस्थ हो चुका था।
- देवदत्त ने माँग की, कि वह पक्षी उसके हवाले कर दिया जाए। सिद्धार्थ ने
इससे इनकार कर दिया। दोनों के बीच तर्क-वितर्क और विवाद होने लगा।
- देवदत्त का तर्क था कि वही पक्षी का मालिक है, क्योंकि शिकार के नियमों
के अनुसार, जो पक्षी को मारता है उसी का पक्षी पर अधिकार है।
- सिद्धार्थ ने नियम के आधार को अस्वीकार कर दिया। उसका तर्क था कि जो