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किसी की रक्षा करता है, वही उसका स्वामी हो सकता है। हत्यारा कैसे किसी
का स्वामी हो सकता है?
- दोनों में से एक भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं था। मामला फैसले के लिए
न्यायालय पहुंचा। न्यायालय द्वारा सिद्धार्थ गौतम के तर्क को न्यायोचित ठहराया
गया।
- देवदत्त तभी से उसका स्थायी शत्रु बन गया। लेकिन सिद्धार्थ की करुणा भावना
इतनी अनुपम थी कि उसने अपने फुफेरे भाई से अच्छा संबंध बनाए रखने से
ज्यादा एक निर्दोष पक्षी की जान बचाना श्रेयस्कर समझा।
- सिद्धार्थ गौतम के आरंभिक जीवन के आचरण की कुछ ऐसी ही प्रवृत्तियाँ
थीं।
8. विवाह
- दण्डपाणि नाम का एक शाक्य था। यशोधरा उसकी बेटी थी। वह अपने सौन्दर्य
और शील के लिए प्रसिद्ध थी।
- यशोधरा सोलह वर्ष की हो गई तो दण्डपाणि उसके विवाह के बारे में सोचने
लगा।
- प्रथा के अनुसार दण्डपाणि ने अपनी बेटी के स्वयंवर में शामिल होने के लिए
पड़ोसी देशों के युवाओं के पास निमंत्रण भेजे।
सिद्धार्थ गौतम को भी आमंत्रित किया गया।
सिद्धार्थ गौतम सोलह वर्ष का हो गया था। उसके माता-पिता भी उसके विवाह
के लिए उतना ही चिंतित थे।
- उन्होंने उसे स्वयंवर में जाने और यशोधरा का पाणिग्रहण करने को कहा। उसने
अपने माता-पिता की बातों को मान लिया।
- स्वयंवर में उपस्थित सभी युवाओं में यशोधरा ने सिद्धार्थ गौतम को चुना।
- दण्डपाणि बहुत खुश नहीं था। उसे उनके दाम्पत्य-जीवन की सफलता पर संदेह
था।
- उसे लगता था कि सिद्धार्थ को साधु-संतों की संगति अच्छी लगती है। वह
एकांत चाहता है। वह एक सफल गृहस्थ कैसे हो सकता है?