402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
4. भिक्षु और उपासक
- धम्म में भिक्षु के ‘धम्म’ और उपासक या गृहस्थ के ‘धम्म’ के मध्य एक
सुस्पष्ट अन्तर है।
- भिक्षु ब्रह्मचर्य से बँधा हैं। उपासक के साथ ऐसा नहीं है। वह विवाह कर सकता
है।
- भिक्षु का कोई भी घर नहीं हो सकता है। उसका कोई परिवार नहीं हो सकता।
उपासक के साथ ऐसा नहीं है। उपासक का एक घर हो सकता है और एक
परिवार हो सकता है।
- भिक्षु के पास कोई सम्पत्ति नहीं हो सकती है, किन्तु एक उपासक सम्पत्ति रख
सकता है।
- भिक्षु के लिये जीव-हिंसा वर्जित है, किन्तु उपासक के लिये ऐसा नहीं है। वह
कर सकता है।
- पंचशील दोनों के लिये सर्वसामान्य है, किन्तु भिक्षु के लिये वे व्रत है। वह
दण्ड का भागी हुए बिना उनको भंग नहीं कर सकता है। उपासक के लिये वे
अनुकरणीय शिक्षा-पद हैं।
- भिक्षु के लिये पंचशील का पालन अनिवार्य है, किन्तु उपासक द्वारा उनका
पालन स्वैच्छिक है।
- तथागत ने ऐसा एक अन्तर क्यों बनाया है? इसके लिये कोई अच्छा कारण
अवश्य होगा। क्योंकि तथागत कोई भी ऐसी बात नहीं करते, जब तक कि
इसके लिये कोई अच्छा कारण नहीं होता।
- इस अन्तर का ‘कारण’ तथागत द्वारा कहीं भी स्पष्ट नहीं कहा गया है। यह
अनुमान लगाने के लिये छोड़ दिया गया है, फिर भी इस अन्तर का कारण
जानना आवश्यक है।
- इसमें कोई सन्देह नहीं है कि तथागत अपने ‘धम्म’ के द्वारा पृथ्वी पर सदाचरण
के एक राज्य की नींव डालना चाहते हैं। इसलिये ही उन्होंने बिना किसी
भेद-भाव के सभी को अपने धम्म का उपदेश दिया, भिक्षुओं को भी साथ ही
साथ गृहस्थों को भी।
- किन्तु तथागत यह भी जानते थे कि केवल सामान्य मनुष्यों को ‘धम्म’ का उपदेश
देने भर से ही उस आदर्श समाज का निर्माण नहीं हो पायेगा, जो सदाचरण पर
आधारित हो।