2. चमत्कारों (प्रतिहार्यों) द्वारा धम-दीक्षा नहीं - Page 435

406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘तुममें से कोई दो एक दिशा में मत जाओ। भिक्षुओ! उस सिद्धांत का उपदेश

दो, जो आदि में कल्याणकारक है, मध्य में कल्याणकारक है, अन्त में कल्याण्

ाकारक है, अर्थ और व्यंजन से युक्त दोनों में ही, पवित्रता के उत्कृष्ट, पूर्ण

और पवित्र जीवन की उद्घोषणा करो।’’

  1. ‘‘प्रत्येक जनपद में जाओ, उन्हें धम्म में दीक्षित, दीक्षित नहीं करो जो अभी

तक धर्मान्तरित हुए हों_ दुःख से दग्ध पड़े इस समस्त संसार में, प्रत्येक स्थल

पर उसको शिक्षा दो, जिसके पास सम्यक ज्ञान नहीं है।’’

  1. ‘‘वहां जाओ जहां महान् ट्टषि, राज ऋषि और ब्रह्म ऋषि भी रहते हैं, ये सब

वहां निवास करते हैं, मनुष्यों को वे अपने मतों के अनुसार प्रभावित करते

हैं।’’

  1. ‘‘इसलिये जाओ, अकेले-अकेले यात्रा करते हुए, अनुकम्पा से परिपूर्ण हो जाओ!

लोगों को बंधन मुक्त करो और धम्म में दीक्षित करो।’’

  1. तथागत ने भिक्षुओ यह भी कहाः

  2. ‘‘धम्म का दान सब दानों से बढ़कर है, धम्म का माधुर्य सब माधुर्यों से बढ़कर

है_, धम्म का आनंद सब आनन्दों से बढ़कर है।’’

  1. ‘‘खेत खर-पतवार से नष्ट हो जाते हैं, मनुष्य मात्र राग से नष्ट हो जाते हैं,

इसलिये धम्म का दान महान फल लाता है।’’

  1. ‘‘खेत खर-पतवार से नष्ट हो जाते हैं, मनुष्य मात्र द्वेष से नष्ट हो जाते हैं,

इसलिये धम्म का दान महान फल लाता है।’’

  1. ‘‘खेत खर-पतवार से नष्ट हो जाते हैं, मनुष्य-मात्र मान से नष्ट हो जाते हैं,

इसलिये धम्म का दान महान फल लाता है।’’

  1. ‘‘खेत खर-पतवार से नष्ट हो जाते हैं, मनुष्य मात्र लोभ से नष्ट हो जाते हैं,

इसलिये धम्म का दान महान फल देता है।’’

  1. तब साठ भिक्षु धम्म के प्रचार का उद्देश्य पूर्ण करने का आदेश पाकर चारों

दिशाओं में फैल गये।

  1. तथागत ने उन्हें धम्म-दीक्षा के विषय में और भी निर्देश दिये।

2. चमत्कारों (प्रतिहार्यों) द्वारा धर्म-दीक्षा नहीं

  1. तथागत एक बार मल्लों के नगर अनुपिय में ठहरे हुए थे।