16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- यशोधरा निश्चय कर चुकी थी कि वह सिद्धार्थ से ही विवाह करेगी। उसने
अपने पिता से पूछा - ‘‘क्या साधु-संतों की संगति करना कोई अपराध हैं?’’
लेकिन वह ऐसा नहीं समझती थी।
- अपनी बेटी का सिद्धार्थ के साथ विवाह करने का निश्चय जानकर यशोधरा की
माँ ने दण्डपाणि से कहा कि अनुमति दे देनी चाहिए। दण्डपाणि ने अनुमति दे
दी।
- गौतम के प्रतिद्वंद्वी न केवल निराश हुए, बल्कि उन्हें लगता था कि उनका
अपमान किया गया है।
- वे चाहते थे कि सबके साथ न्याय के लिए यशोधरा को चुनाव के लिए किसी
प्रकार की परीक्षा लेनी चाहिए, परंतु उसने वैसा नहीं किया।
- कुछ समय के लिए वे चुप रहे। उन्हें विश्वास था कि दण्डपाणि यशोधरा को
सिद्धार्थ को चुनने की अनुमति नहीं देगा और उनका उद्देश्य पूरा हो जाएगा।
- लेकिन जब दण्डपाणि असफल रहा, तो उन्होंने दृढ़तापूर्वक धनुर्विद्या की लक्ष्यवेध
परीक्षा आयोजित करने की माँग की। दण्डपाणि को वह प्रस्ताव स्वीकार करना
ही पड़ा।
- पहले तो सिद्धार्थ इसके लिए तैयार नहीं था। परंतु उसके सारथी छन्न ने उसे
बताया कि यदि वह इसे अस्वीकार करेगा तो उसके पिता, परिवार और यशोधरा
के लिए बहुत ही लज्जा की बात होगी।
- इस तर्क से सिद्धार्थ गौतम बहुत प्रभावित हुआ और उसने परीक्षा में भाग लेना
स्वीकार कर लिया।
- प्रतियोगिता आरम्भ हुई। बारी-बारी से प्रत्येक प्रतिद्वंद्वी ने अपना-अपना कौशल
दिखाया।
- गौतम की बारी सबसे अंत में आई। किन्तु उसका लक्षबेध सवोत्तम माना
गया।
- उसके बाद विवाह संपन्न हुआ। शुद्धोदन और दण्डपाणि दोनों बहुत प्रसन्न थे।
यशोधरा और महाप्रजापति भी प्रसन्न थीं।
- विवाह के काफी समय पश्चात् यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसका
नाम राहुल रखा गया।