3. जोर-जबर्दस्ती से धर्मान्तरण नहीं - Page 440

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  1. ‘‘किन्तु साथ ही, भिक्षुओ! बाहरी लोग मेरी प्रशंसा में, धम्म की प्रशंसा में,

संघ की प्रशंसा में कह सकते हैं। वे क्या बात हैं जब वे मेरी प्रशंसा में कहेंगे

तो तुम कहोगे?’’

  1. ‘‘कोई कह सकता है ‘प्राणी हिंसा को त्याग कर श्रमण गौतम हिंसा से विरत

रहते हैं। उन्होंने दण्ड और तलवार का सर्वथा त्याग कर दिया है, और कठोर

व्यवहार से विरत तथा करुणा से परिपूर्ण वे सभी सजीव प्राणियों के प्रति दयालु

और स्नेही बन रहे हैं। अतः कोई भी अधर्मान्तरित मनुष्य, जब तथागत की

प्रशंसा में बोल रहा हो तो इस प्रकार बोल सकते हो।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता हैः ‘श्रमण गौतम अदिन्नादान (चोरी), जो उनका नहीं

है, उसे अपना बनाने से दूर रहते हैं। वह केवल वहीं लेते हैं जो उन्हें दिया

जाता है और आशा रखते हैं कि भेटें प्राप्त होंगी। वह अपना जीवन ईमानदारी

और मन की पवित्रता के साथ व्यतीत करते हैं।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता हैः श्रमण गौतम अब्रह्मचर्य से विरत रह कर शुद्ध हैं।

वह स्वयं को अश्लील आचरण से मैथुन क्रिया से दूर बहुत दूर रखते हैं।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता हैः श्रमण गौतम, झूठ बोलने से विरत रह, और स्वयं

को मृषावाद से दूर रखते हैं। वह सत्य बोलते हैं, वे संसार को कहे गये अपने

वचनों को भंग नहीं करते।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता है कि श्रमण गौतम ‘मिथ्यापवाद से विरत रह, स्वयं

को झूठी निन्दा से दूर रखते हैं। जो कुछ वह यहां सुनते हैं, उसे वह यहां

के लोगों के मध्य झगड़ा उत्पन्न करने के लिये कहीं और दोहराते नहीं_ जो

कुछ वह कहीं और सुनते हैं, उसे वहां के लोगों के मध्य एक झगड़ा उत्पन्न

करने के लिये वह यहां नहीं दोहराते है। इस प्रकार वह जो विभाजित हैं, उन्हें

एक साथ बाँधने वाले के रूप में, जो मित्र हैं उनके प्रेरक के रूप में, एक

शांति-स्थापक, एक शान्ति के इच्छुक, शान्ति के लिये प्रयत्नशील जो शांति

स्थापित करते हैं, ऐसे वचनों के वक्ता के रूप में जीवन व्यतीत करते हैं।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता है कि श्रमण गौतम वाणी की कटुता से विरत रह, स्वयं

को कठोर वचनों से दूर रखते हैं। जो कोई वचन निर्दोष हैं, कानों को मधुर हैं,

प्रिय हैं, हृदय तक जाते हैं, सौम्य, लोगों को मोहित करने वाले हैं, लोगों के

प्रिय हैं, वही वचन बोलते हैं।’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता हैः ‘कि श्रमण गौतम स्वयं को क्षुद्र बातों से विरत रह,

वार्तालाप से दूर रखते हैं। वह समयानुसार बोलते हैं, तथ्यों के आधार पर बोलते

हैं, अर्थ से भरे वचन, धर्म पर, संघ के नियमों पर बोलते हैं। वह सही समय