3. जोर-जबर्दस्ती से धर्मान्तरण नहीं - Page 441

412 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

पर किसी के मन में घर करने योग्य वचन, पूर्णतया उदाहरणों सहित, स्पष्टतया

विभाजित, विषय पर केन्द्रित वचन ही बोलते हैं।’’’

  1. ‘‘या कोई कह सकता है श्रमण गौतम स्वयं को बीजों या पौधों को हानि पहुंचाने

से दूर रखते हैं।’’

- वे एक दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं, रात को कोई भोजन

ग्रहण नहीं करते हैं, अपराह्न के पश्चात् विकाल भोजन नहीं करते हैं।

- वे प्रदर्शनों, मेलों में नृत्य-गीत और संगीत का दर्शक बनने से विरत रहते

हैं।

- वे माला, इत्र और लेपों को स्वयं पहनने, सजाने व अलंकृत करने से विरत

रहते हैं।

- वे विशाल और ऊंची शैय्याओं के प्रयोग से विरत रहते हैं।

- वे रजत और स्वर्ण स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे बिना पका अनाज स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे स्त्रियों और लड़कियों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे दास-दासियों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे भेड़ या बकरियों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे मुर्गे-मुर्गियों या सुअरों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे हाथियों, गाय-भैंसों, घोड़ों और घोडि़यों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं।

- वे बोये हुए या ऊसर खेतों को स्वीकार करने से विरत रहते हैं। वे एक

मध्यस्थ या संदेशवाहक के रूप में कार्य करने से विरत रहते हैं।

- वे क्रय और विक्रय से विरत रहते हैं।

- वे तराजू या बंटवारे या पैमानों द्वारा ठगने से विरत रहते हैं।

- वे रिश्वत, ठगी और धोखे के कुटिल तरीकों से विरत रहते हैं।

- वे अंग-भंग करने, हत्या करने, बंधनों से जकड़ने, राज मार्ग की डकैती,

लूटपाट और हिंसा से विरत रहते हैं।

  1. ‘‘भिक्षुओ! ये ऐसी बातें हैं जिन्हें एक धम्म की दीक्षा न ग्रहण करने वाला

मनुष्य, जब तथागत की प्रशंसा में बोल रहा हो, कह सकता है। किन्तु तुम

लोगों को यहां तक कि उस आधार पर भी, आनन्द या हर्ष से फूलना नहीं

चाहिये, या मन प्रफुल्लित नहीं करना चाहिये। यदि तुम लोग ऐसे होंगे, वह भी