418 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘भिक्षा प्राप्त कर लेने पर, अकेले लौटो और एकान्त में बैठकर स्थित चित्त
से विचार करो तो कभी भी तुम्हें बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।’’ 20. ‘‘भिक्षुओ! सज्जन लोगों के साथ वार्तालाप में धम्म को ही अपनी चर्चा का
विषय रखो।’’
- ‘‘भिक्षा, विहार, शैय्या, जल और सफाई को केवल साधन मानो और कुछ भी
नहीं।’’
- ‘‘इस प्रकार का तर्कसंगत प्रयोग कर भिक्षु उसी प्रकार निर्लिप्त रखेगा जैसे
कमल का पत्ता, जिस पर जल की कोई भी बूंद नहीं टिकती।’’ 23. तथागत ने कहा, ‘‘अब मैं उन शीलों पर आता हूँ, जो उपासकों को परिशुद्ध
करते हैं। उनको मैं कहता हूँ-
- ‘‘किसी प्राणी की हत्या मत करो, न प्राणी-हिंसा का अनुमोदन करो। किसी
के प्रति जो सजीव है, सबल है या दुर्बल, हिंसा मत करो। सभी प्राणियों से
प्रेम करो।’’
- ‘‘किसी गृहस्थ की जान-बूझ कर चोरी नहीं करनी चाहिये_ केवल वही लेना
चाहिये जो दूसरे देते हैं।’’
- ‘‘व्यभिचार से दूर रहो, जैसे वह एक अग्नि-कुण्ड हो, ब्रह्मचर्य की कमी पर
किसी विवाहित पत्नी को पथ-भ्रष्ट मत करो।’’
- ‘‘सभाओं, न्यायालयों में झूठ नहीं बोलना चाहिये, झूठ को प्रोत्साहित या अनुमोदित
नहीं करना चाहिये। उसे असत्य को त्याग देना चाहिए।’’
- ‘‘इस नियम का पालन करोः मद्यपान से दूर रहो, किसी व्यक्ति को मद्यपान
न कराओ_ मद्यपान का अनुमोदन न करो। इस बात पर ध्यान दो कि मद्यपान
पागलपन की ओर कैसे ले जाता है।’’
- ‘‘मद्यपान के द्वारा मूर्ख पाप करते हैं और लापरवाह साथियों को पाप से प्रवृत्त
करते हैं। अतः इस पागल बनाने वाले व्यसन, मूर्खता से दूर रहें या मूर्खों का
स्वर्ग है।’’
- ‘‘प्राणी-हिंसा न करें, चोरी न करें, झूठ न बोलें, नशीले पेय पदार्थों से दूर रहें,
व्यभिचार से दूर रहें।’’
- ‘‘अतः उपोसय के दिनों में अपने उपोसथ व्रतों का पालन करें जैसे सप्ताह के
पश्चात्, सप्ताह आते हैं, पवित्र हृदयों से इन अष्ट-शीलों का पालन करें।’’