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9. पुत्र के संरक्षण हेतु पिता की योजनाएँ
- यद्यपि राजा प्रसन्न थे कि पुत्र का विवाह हो गया और वह गृहस्थ आश्रम में
प्रवेश कर गया, लेकिन असित ऋषि की भविष्यवाणी उन्हें अभी भी परेशान
कर रही थी।
- भविष्यवाणी को पूरा होने से रोकने के लिए उसने सोचा कि सिद्धार्थ को
काम-भोगों के बंधन में लीन रखा जाये।
- इसी उद्देश्य से शुद्धोदन ने अपने पुत्र के रहने के लिए तीन शानदार महल
बनवाए- एक ग्रीष्म ऋतु, दूसरा वर्षा ऋतु और तीसरा शीत ऋतु के लिए।
तीनों महलों को भोग-विलास के सभी साधनों से सुसज्जित कराया गया था।
- प्रत्येक महल एक विस्तृत उद्यान से घिरा हुआ था, जिसे विभिन्न प्रकार के
वृक्षों और पुष्पों से सुन्दर ढंग से सजाया गया था।
- अपने कुल-पुरोहित उदायीके परामर्श से शुद्धोदन ने राजकुमार के लिए एक
ऐसा अन्तःपुर बनाने की सोची जहाँ अत्यधिक सुन्दर स्त्रियां हों।
- शुद्धोदन ने उदायी को इन सुन्दरियों को यह समझा देने के लिए कहा कि
राजकुमार का मन सुख-सुविधाओं में आसक्त रखने के लिए क्या-क्या प्रयास
किए जाएं।
- अन्तःपुर की सुन्दरियों को एक जगह बुलाकर उदायी ने सबसे पहले कुमार का
चित्त लुभाने का संकेत तो किया ही, विधि भी बताई।
- उन्हें सम्बोधित करते हुए उसने कहा-‘‘आप सभी ललित कलाओं में निपुण हैं,
आप सभी कामुक भावनाओं की भाषा समझने में निपुण हैं, आप में सुन्दरता
और लावण्य है, आप अपनी कला में कुशल हैं।’’
- ‘‘आप अपने रूप-लावण्य से ऋषियों को भी जीत सकती हैं, जिन्होंने अपनी
इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर ली है, देवताओं को भी अपने जाल में फँसा
सकती हैं जिन्हें केवल स्वर्गलोक की अप्सराएँ ही भाती हैं।’’
- दिल की भावनाओं को व्यक्त करने की कला, अपने नाज-नखरों व रूप-लावण्य
और अपूर्व सुन्दरता के बल पर आप पुरुषों की तो बात ही क्या, महिलाओं को
भी मोहित कर सकती हैं।’’
- ‘‘आप अपने-अपने क्षेत्र में इतनी दक्ष हैं कि राजकुमार को कामरूपी रस्सी से