2. गृहस्थों के लिए विनय (जीवन-नियम) - Page 452

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सम्मान करते हुए इस प्रकार प्रणाम करता हूँ।’’

  1. तथागत ने पूछा, ‘‘किन्तु यह संसार के मनुष्य का सच्चा धर्म किस प्रकार हो

सकता है? सिगाल ने पूछा, ‘‘यदि ऐसा कुछ है तो बड़ी कृपा होगी यदि तथागत

मुझे बताएं कि आदमी का दूसरा सच्चा धर्म क्या होता है?’’ 6. ‘‘तब सुनो युवा गृहस्थ! मेरे शब्दों पर ध्यान दो, और मैं तुम्हें बताता हूँ कि

वह क्या है?’’ ‘‘ऐसा ही हो, भगवान्!’’ युवक ने उत्तर दिया। और तथागत ने

कहाः

  1. ‘‘एक धर्म तभी मनुष्य का सद्धर्म हो सकता है, यदि वह उसे बुरे आचरण

का त्याग करने की शिक्षा दे। प्राणियों की हिंसा, चोरी, व्यभिचार और असत्य

बोलना-आचरण के चार अवगुण हैं, जिनसे उसे अवश्य बचना चाहिये।’’ 8. ‘‘सिगाल! तुम जान लो पाप-कर्म पक्षपात, शत्रुता, मूर्खता और भय के कारण किये

जाते हैं। यदि वह इन उद्देश्यों से प्रेरित न हो, तो वह पाप-कर्म नहीं करेगा।’’ 9. ‘‘एक धर्म तभी मनुष्य का सद्धर्म हो सकता है, यदि वह उसे अपने धन को

अपव्यय न करने की शिक्षा दे। धन का अपव्यय, नशीले पेय पदार्थों का आदी

होने, अनुचित समय में गलियों में घूमने, मेले देखने, जुए की लत लगाने,

कुसंगति में पड़ जाने, आलस्य की आदत के परिणामस्वरूप होता है।’’ 10. ‘‘सिगाल! नशीले पेय पदार्थों का आदी होने के छः दोष हैंः (1) धन की

वास्तविक हानि, (2) कलह होना, (3) रोग की सम्भावना, (4) चरित्र की

हानि, (5) अश्लील नग्नता, तथा (6) बुद्धि की हानि।’’

  1. ‘‘अनुचित समय में गलियों में घूमने से छः हैंः ‘‘(1) वह स्वयं अरक्षित

रहता है (2) उसकी पत्नी और बच्चे अरक्षित रहते हैं, (3) उसकी सम्पत्ति

भी अरक्षित रहती है, (4) अज्ञात अपराधों का सन्देहास्पद कर्त्ता बन जाता है,

(5) उसके साथ अफवाहें जुड़ जाती हैं, और (6) उसे अनेक विपत्तियों का

सामना करना पड़ता है।’’

  1. ‘‘मेले-तमाशे में घूमने-फिरने के छह संकट हैंः (1) वह सदैव सोचता है कि

कहाँ नृत्य है? (2) कहाँ संगीत है? (3) कहाँ गायन है? (4) कहाँ बजाना है?

(5) कहाँ झाँझ-मंजीरे हैं? (6) कहाँ टम-टम हैं?’’

  1. ‘‘जो जुए की लत का शिकार हैं, उसके लिये छह संकट हैंः (1) विजेता

के रूप में वह घृणा उत्पन्न करता है, (2) जब हारता है, तो वह अपने हारे

धन का शोक करता है। (3) उसकी वास्तविक धन सम्पत्ति व्यर्थ हो जाती

है, (4) न्यायालय में उसके शब्दों का कोई मोल नहीं रह जाता है, (5) वह

मित्रों और अधिकारियों द्वारा तिरस्कृत होता है, (6) विवाह-सम्बन्ध करना नहीं