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434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. जीवक के पास राजगृह में अपना उद्यान था, जो आम्रवन के नाम से जाना जाता

था और जो उसके निवास-स्थान के पर्याप्त समीप था।

  1. उसने उसको सभी अंगों से युक्त एक विहार बनवाने तथा आम्रवन व विहार

तथागत को समर्पित करने के विषय में सोचा।

  1. अपने मन में यह विचार लेकर, वह तथागत के पास गया और उनसे अपनी

इच्छायें पूर्ण करने की कामना की।

  1. तथागत ने मौन रह कर अपनी स्वीकृति दर्शायी

4. आम्रपालि का दान

  1. उस समय तथागत नादिका में ठहरे हुए थे और स्थान-परिवर्तन की इच्छा कर

रहे थे। उन्होंने आनन्द को सम्बोधित किया और कहा, ‘‘आओ, आनन्द! हम

वैशाली की ओर चलें।’’

  1. ‘‘ऐसा ही हो भगवन्,’’ आनन्द ने स्वीकृति के रूप में तथागत से कहा।
  2. तब तथागत ने एक विशाल भिक्षु-संघ के साथ वैशाली के लिये प्रस्थान किया

और वहाँ (वैशाली में) तथागत आम्रपालि के आम्रवन में ठहरे। 4. अब गणिका आम्रपालि ने सुना कि तथागत वैशाली में आये हैं और उसके

आम्रवन में ठहरे हुए हैं। तो अपने राजकीय वाहनों को तैयार होने का आदेश

देकर, वह उनमें से एक में चढ़ कर, और अपने कारवां सहित वैशाली से अपने

आम्रवन की ओर गयी। वह वहाँ तक रथ में गयी, जहाँ तक रथ द्वारा जाने के

लिये जमीन उपयुक्त थी_ इसके बाद उसने पैदल उस स्थल की ओर प्रस्थान

किया जहाँ तथागत थे और आदरपूर्वक अभिवादन कर एक ओर अपना आसन

ग्रहण किया। और जब उसने तथागत का प्रवचन ग्रहण किया। 5. उसके बाद उसने तथागत को सम्बोधित किया और कहा, ‘‘भगवान्! भिक्षु-संघ

के साथ कल मेरे घर में भोजन ग्रहण कर मुझे सम्मानित करेंगे?’’ 6. तथागत ने मौन द्वारा अपनी स्वीकृति दी। तब जब गणिका आम्रपालि ने देखा

कि तथागत ने स्वीकृति दे दी, वह अपने आसन से उठी और उन्हें अभिवादन

किया तथा उनकी प्रदक्षिणा कर वह वहाँ से चली गयी।

  1. जब वैशाली के लिच्छवियों ने सुना कि तथागत वैशाली में आये हुए हैं, और

आम्रपालि के आम्रवन में ठहरे हुए हैं। वे भी बुद्ध को भोजन के लिये अपने

निवास-स्थान पर आमंत्रित करना चाहते थे और अनके राजकीय वाहनों को