5. विशाखा की दान-शीलता - Page 467

438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘चौथे, भगवान्! बीमार भिक्षु को उचित भोजन न मिले, तो उसका रोग बढ़

भी सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।’’

  1. ‘‘पाँचवें, भगवान्! भिक्षु जो रोगी की सेवा-सुश्रुषा कर रहा हो, तो उसको अपना

भोजन प्राप्त करने के लिये बाहर जाने का अवसर नहीं मिल सकता।’’

  1. ‘‘छठे भगवान्! यदि रोगी भिक्खु को उचित दवायें नहीं प्राप्त हों, तो उसका

रोग बढ़ भी सकता है, और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।’’

  1. ‘‘सातवें, भगवान्! मैंने सुना है कि तथागत ने चावल-दूध (खीर, पायस) की

प्रशंसा की है, क्योंकि यह बुद्धि को तत्परता देता है, भूख और प्यास को मिटाता

है_ यह स्वास्थ के लिये पौष्टिक आहार है और रोगी के लिये यह दवा है।

इसलिये मैं अपने पूरे जीवन-काल के दौरान संघ को चावल-दूध की निरंतर

आपूर्ति उपलब्ध कराने की इच्छा रखती हूँ।’’ ‘‘अन्त में, भगवान!, भिक्षुणियों

को अचिरवती नदी में एक ही घाट पर गणिकाओं के साथ भी नग्नावस्था में

नहाने की आदत है। भगवान! उस समय गणिकायें यह कहकर भिक्षुणियों का

मजाक उड़ाती हैं, देवियों जब तुम युवा हो, तो इस ब्रह्मचर्य पालन से क्या

प्रयोजन है? जब वृद्ध हो जाओ तब ब्रह्मचर्य पालन करना, इस प्रकार तुम्हारे

दोनों हाथों में लड्डू रहेंगे। भगवान्! नग्नता स्त्री के लिये अशुचिपूर्ण, घृणित

और वीभत्स है।’’

  1. भगवान्! ‘‘ये ही परिस्थितियाँ हैं जो मेरे ध्यान में थीं।’’

  2. तथागत ने कहा, ‘‘हे विशाखा! किन्तु तथागत से इन आठ वरदानों को माँगने

में स्वयं तुम्हारे लिये तुम्हारे ध्यान में क्या प्रयोजन थे?’’

  1. विशाखा ने उत्तर दिया, ‘‘भगवान्! वे भिक्षु, जिन्होंने विभिन्न स्थलों पर वर्षा-काल

व्यतीत किया है, तथागत से मिलने श्रावस्ती से आयेंगे। और तथागत के पास

आने पर वे कहेंगे, भगवान्! अमुक-अमुक भिक्षु की मृत्यु हो गयी है। अब

उसकी गति क्या है?’ तब तथागत जैसा भी विषय होगा स्पष्ट करेंगे कि उसने

स्रोतापन्न आदि मार्ग-फल प्राप्त कर लिया है_ कि उसने निर्वाण में प्रवेश कर

लिया है या अर्हत् पद प्राप्त कर लिया है।’’

  1. ‘‘और मैं, उनके पास जाकर, पूछूँगी, भिक्षुओ! क्या वह भिक्षु उनमें से एक

था, जो पहले श्रावस्ती में थे, तब मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचूँगी, ‘निश्चय ही उस

भिक्षु ने वर्षा काल के लिये चीवर प्राप्त किया होगा, या आगन्तुक भिक्षुओं ने

भोजन किया होगा, या निर्गामी भिक्षुओं ने भोजन किया होगा, या रोगी के लिये

दिया भोजन किया होगा, या वह भोजन प्राप्त किया होगा जो रोगी की सेवा