444 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
प्रकट कर दे या जो पथ-भ्रष्ट हो गया हो उसे रास्ता दिखा दे या जो ढँका हुआ
हो उसे उधाड़ दे या जो भटक गया हो ऐसे मनुष्य को सही मार्ग बता दे, या
अन्धेरे में प्रदीप जला दे, जिनके पास देखने के लिये आँखें हैं वह अपने चारों
ओर की वस्तुओं को देख सकें-इसी प्रकार विभिन्न तरीकों से गौतम ने अपना
धम्म स्पष्ट कर दिया है।
- ‘‘मैं बुद्ध, धम्म तथा संघ की शरण ग्रहण करता हूँ। मुझे तथागत के हाथों
प्रव्रज्या और उप-सम्पदा मिले!’’ इस प्रकार ब्राह्मण कसि-भारद्वाज को उपसम्पदा
मिली और तथागत के भिक्खु के रूप में पहचान मिली।
3. सुखी गृहस्थियों को उजाड़ने का आरोप
- यह देखकर कि मगध के अनेक कुल-पुत्र तथागत के शिष्य बने गये थे। लोग
यह कहते हुए असन्तुष्ट और क्रोधित हो गये थे, ‘‘श्रमण गौतम, माता-पिताओं
को संतान-विहीन बना रहा है, श्रमण गौतम पत्नियों को विधवा बना रहा है,
श्रमण गौतम परिवारों का उजाड़ रहा है।’’
- ‘‘अभी उसने एक हजार जटिलों को दीक्षित किया है, और उसने संजय के दो
सौ पास परिव्राजकों को प्रव्रजित किया है और ये अनेक युवक मगध कुल-पुत्र
अब श्रमण गौतम के अधीन पवित्र जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अब आगे क्या
होने वाला है? कोई भी नहीं कह सकता।’’
- और इसके अतिरिक्त, जब वे भिक्खुओं को देखते हैं, तो उन्हें निम्नलिखित
शब्दों से उनकी निन्दा करते हैं, ‘‘महाश्रमण मगध लोगों के राजगृह में आया
है, उसके साथ संजय के सभी अनुयायी घूमते हैं,’’ अब पता नहीं किसकी
बारी है?’’
- भिक्षुओं ने इस आरोप को सुना और उन्होंने तथागत को इसके विषय में सूचित
किया।
- तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘भिक्षुओं! यह शोर, अधिक दिनों तक नहीं चलेगा, यह
केवल सात दिनों के पश्चात् समाप्त हो जायेगा। ’’
- ‘‘और भिक्षुओ! यदि वे तुम्हारी भर्त्सना करते हैं, तो तुम्हें उत्तर देना चाहिये कि यह
वास्तव में हितकारी धम्म है, जिसके महान विजेता, तथागत अगुवाई करते हैं। यदि
बुद्धिमान लोगों को सद्धम्म के मार्ग पर ले जाते हैं, तो ऐसे बुद्धिमान मनुष्य से
कोई क्यों ईर्ष्या करेगा? मेरे धम्म में कोई बाध्यता नहीं है। कोई भी गृह-त्याग करने
के लिये स्वतन्त्र है। कोई भी चाहे तो अपने घर में ही बना रह सकता है।’’