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- जब भिक्षुओं ने निन्दा करने वालों को वैसा उत्तर दिया जैसा कि तथागत ने
उन्हें समझ गया था, तब लोग समझ गये। ‘‘धम्म द्वारा न कि अधम्म द्वारा
साक्यपुत्तिय श्रमण मनुष्यों की अगुवाई करते हैं,’’ और तथागत को दोष देना
बंद कर दिया।
4. तैर्थिकों द्वारा हत्या का मिथ्यारोप
- तैर्थिकों ने यह अनुभव करना प्रारम्भ कर दिया था कि श्रमण गौतम के आविर्भाव
के साथ लोगों ने अब उनका सम्मान करना छोड़ दिया है और यहाँ तक कि
कुछ लोग तो उनके अस्तित्व के विषय में जानते तक नहीं हैं। 2. अतः तैर्थिक सोचने लगे ‘‘क्या किसी षड्यन्त्र द्वारा, हम उसकी प्रतिष्ठा घटा
सकते हैं, सम्भवतः सुन्दरी की सहायता से हम सफल हो जायें।’’ 3. तब वे सुन्दरी के पास गये और उससे बोले, ‘‘बहन! तुम अत्यन्त सुन्दर और
मनोरम हो। यदि तुम श्रमण गौतम के विषय में अपयश फैला दो, तो हो सकता
है लोग तुम्हारा विश्वास कर लें, और इससे उसका प्रभाव घट सकता है।’’ 4. सुन्दरी प्रत्येक शाम फूलमालाओं, कपूर और सुगंधित इत्रों को लेकर जेतवन की
ओर जाया करती। जब लोग नगर को लौटा करते थे, तो कोई उससे पूछता,
‘‘सुन्दरी! तुम कहाँ जा रही हो?’’ वह उत्तर दिया करती थी, ‘‘मैं श्रमण गौतम
के पास गन्ध कुटी में रुकने जा रही हूँ।’’
- और तीर्थिकों के किसी उद्यान में रात व्यतीत करके, वह सुबह लौट आया
करती थी, और यदि कोई उनसे पूछता था, उसने अपनी रात कहाँ व्यतीत की,
वह कहा करती थी कि उसने गौतम के साथ रात व्यतीत की। 6. कुछ दिनों पश्चात् तैर्थिकों ने कुछ हत्यारों को कुछ ले-देकर उन्हें कहा, ‘‘सुन्दरी
की हत्या कर दो और उसका शव गौतम की गन्ध कुटी के समीप कूड़े के ढेर
पर फेंक दो।’’ यह हत्यारों ने कर भी दिया।
- तब तैर्थिकों ने यह सूचना शान्ति व न्याय के अधिकारियों तक पहुँचा दी कि
सुन्दरी प्रायः जेतवन जाया करती थी और वह लापता है।
- अतः अधिकारियों को साथ लेकर उन्होंने सुन्दरी के शव को कूड़े के ढेर पर
से खोज लिया।
- तैर्थिकों ने गौतम के अनुयायियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने नेता की
लज्जा को ढँके रखने के लिये सुन्दरी की हत्या कर दी।