5. तैर्थिकों द्वारा अनैतिकता का मिथ्यारोप - Page 475

446 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. किन्तु हत्यारे सुन्दरी की हत्या करने के बदले मिले धन के बँटवारे को लेकर

में एक शराब की दुकान में आपस में ही लड़ने लगे।

  1. अधिकारियों ने तुरंत ही उन्हें गिरफतार कर लिया और उन्होंने अपना अपराध

स्वीकार कर लिया और उन तैर्थिकों को भी फँसा दिया जिनके उकसाने पर

उन्होंने यह अपराध किया था।

  1. इस प्रकार तैर्थिकों ने रहा-सहा प्रभाव भी खो दिया।

5 जैनियों द्वारा अनैतिकता का मिथ्यारोप

  1. जिस प्रकार सूर्योदय के साथ जुगनू लुप्त हो जाते हैं, उसी प्रकार

तैर्थिकों की स्थिति दयनीय हो गयी थी। लोगों ने उन्हें सम्मान तथा दान देना

बन्द कर दिया था।

  1. आम रास्तों पर खड़े होकर वे उग्र भाषण दिया करते थे, ‘‘यदि श्रमण गौतम

प्रबुद्ध हैं, तो हम भी हैं। यदि तुम बुद्ध पर दान की वर्षा करने से पुण्य अर्जित

करते हो, तो तुम्हें वही सब कुछ हमें भी दान देने से प्राप्त होगा। इसलिये हमें

दान दो।’’

  1. किन्तु लोगों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। तब उन्होंने गुप्त रूप से षड्यंत्र

रचा कि श्रमण गौतम चरित्र के विषय में अपयश फैला कर वे संघ को कैसे

बदनाम कर सकते हैं।

  1. उस समय श्रावस्ती में एक ब्राह्मणी परिव्राजिका रहती थी। जो नाम से जानी

जाती थी। शारीरिक संरचना और दैहिक आकर्षण में वह एक सम्मोहक सुन्दरी

थी। अपनी शारीरिक भाव-भंगिमाओं से कामोत्तेजक लालित्यपूर्ण थी। 5. तैर्थिकों में से एक षड्यन्त्रकारी ने कहा, ‘‘चिंचा की सहायता से गौतम के

विषय में एक अपयश फैलाना होगा। और इस प्रकार उनको बदनाम करना सरल

होगा,’’ इस पर अन्य तैर्थिकों ने अपनी सहमति दे दी।

  1. तब, एक दिन चिंचा तैर्थिकों के उद्यान में आई उन्हें अभिवादन करते हुए, उनके

समीप बैठ गयी। किन्तु किसी ने उससे बात नहीं की।

  1. इस पर आश्चर्यचकित होकर उसने कहा, ‘‘क्या मैंने कोई अपराध किया है?

मैंने आपको तीन बार अभिवादन किया तो भी आपने मुझसे एक भी शब्द नहीं

बोला।’’

  1. तैर्थिकों ने कहा, ‘‘बहन! क्या तुम नहीं जानती हो कि श्रमण गौतम अपनी