5. तैर्थिकों द्वारा अनैतिकता का मिथ्यारोप - Page 476

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लोकप्रियता द्वारा हमें हानि पहुँचा रहा है।’’ मैं नहीं जानती, ‘‘इसके लिये मुझे

क्या करना है?’’

  1. ‘‘बहन! यदि तुम हमारा भला करना चाहती हो, तो अपने प्रयत्नों द्वारा गौतम के

विषय में अपयश फैला दो इससे उसे अलोकप्रिय बना दो।’’ ‘‘ठीक है, सन्तोष

रखो और मुझ पर भरोसा रखो’’, इस प्रकार कहते हुए वह वहाँ से चली गयी।

  1. चिंचा ‘स्त्री-चरित्र’ दिखाने में पारंगत थी। जब श्रावस्ती के नागरिक जेतवन

से धार्मिक प्रवचनों को सुन कर लौटा करते थे, तो चिंचा लाल वस्त्र धारण

किये हुए अपने हाथों में सुगंध और फूल-माला लेकर जेतवन की ओर जाया

करती।

  1. यदि कोई उससे पूछा करता, ‘‘तुम अब कहाँ जा रही हो?’’, ‘‘इससे तुम्हें क्या

लेना-देना है,’’ वह उत्तर दिया करती थी। जेतवन के समीप तैर्थिकाराम में रात

व्यतीत करने के उपरान्त, वह सुबह नगर को लौटा करती थी, जब नागरिक

बुद्ध को सम्मान देने के लिये जेतवन की ओर जाया करते थे।

  1. यदि कोई उससे पूछा करता ‘‘तुमने रात कहाँ व्यतीत की?’’ वह कहा करती

थी, ‘‘इससे तुम्हें क्या लेना-देना है। मैंने जेतवन में श्रमण गौतम के साथ उनकी

गन्ध-कुटी में रात व्यतीत की है।’’ यह कथन कुछ लोगों के मन में शंका

उत्पन्न किया करता था।

  1. चार महीने के उपरान्त उसने कुछ पुराने चिथड़ों को अपने पेट पर एवं इर्द-गिर्द

लपेटकर पेट के आकार को बढ़ा लिया और कहने लगी कि वह श्रमण गौतम

द्वारा गर्भवती हो गयी है। कुछ लोगों ने इस पर विश्वास करना प्रारम्भ कर

दिया।

  1. नौवें महीने में, उसने अपने पेट के ऊपर एक गोल एवं खाली लकड़ी का टुकड़ा

बाँध लिया और कीड़ों के डंक से अपनी बाँहों को सुजा लिया। भगवान् बुद्ध

‘‘भिक्षुओं और गृहस्थों के समक्ष एक धार्मिक प्रवचन दे रहे थे, जब वह वहां

पर आई और बोली, महान आचार्य आप अनेक लोगों को धार्मिक उपदेश देते

हैं। आपकी वाणी मधुर है, और आपके होंठ बहुत कोमल हैं। आपके सहवास

से मैं गर्भवती हो गयी हूँ और मेरा प्रसव-काल समीप है।

  1. ‘‘आपने न तो मेरे लिये कोई प्रसव का स्थान निश्चित किया है और न ही मैं

उस आपात्काल के लिये कोई दवा इत्यादि देखती हूँ। यदि आप स्वयं उसकी

व्यवस्था नहीं कर सकते, तो क्यों नहीं आप अपने शिष्यों में से किसी को जैसे

कोशल नरेश, अनाथपिण्डिक या विशाखा को इस काम के लिये वह देते।’’