450 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- तब एक आदमी को देवदत्त ने आदेश दिया, ‘‘जाओ, मेरे मित्र! श्रमण गौतम अमुक
स्थान पर ठहरे हुए हैं। उनका वध कर दो।’’ और आदमी जाकर लौट आया और
उससे कहा, ‘‘मैं तथागत को उनके जीवन से वंचित-नहीं कर सकता हूँ।’’ 21. उसने बुद्ध का जीवन समाप्त करने का एक तीसरा प्रयास भी किया। 22. इस बार राजगृह में नालागिरी नामक एक हाथी था, जो खूंखार और नर-हत्यारा
था।
- देवदत्त राजगृह में हाथियों के अस्तबल में गया और हाथियों की देखभाल करने
वालों से कहा, ‘‘मैं अपने मित्र राजा का एक संबंधी हूँ, और नीचे पद पर
लगे एक व्यक्ति को उच्च पद पर पहुँचाने में सक्षम हूँ, और उसकी राशन या
उसके वेतन में वृद्धि का आदेश देने में सक्षम हूँ।’’
- इसलिये, मेरे मित्रों! जब श्रमण गौतम इस मार्ग पर आ चुका हो, तब नालागिरी
हाथी को छोड़ दो और उसे सड़क पर आगे तक जाने दो।
- देवदत्त ने भगवान बुद्ध की हत्या के लिये धनुषधारियों को काम में लगाया था।
उसने मदमस्त नालागिरि हाथी को भी, उनके मार्ग में खुला छुड़वाया। 26. किन्तु वह सफल नहीं हुआ। जब ये दुष्ट प्रयास लोगों को ज्ञात हो गये, तो
देवदत्त को मिलने वाला समस्त लोक दान खो दिया। और यहाँ तक कि राजा
अजातशत्रु ने उससे मिलना-जुलना बन्द कर दिया।
- जीवनयापन के लिये उसे घर-घर भीख माँगनी पड़ती थी। देवदत्त अजातशत्रु से
बहुत कुछ प्राप्त होता था, जिन्हें वह अधिक समय तक संजोकर नहीं रख पाया।
देवदत्त ने अपना समस्त प्रभाव नालागिरी की घटना के पश्चात् खो दिया। 28. अपनी करतूतों द्वारा मगध में अत्यन्त अलोकप्रिय होने पर देवदत्त उसे छोड़
कोशल चला गया, यह सोचते हुए कि सम्भवतः प्रसेनजित् उसका सौहार्द से
स्वागत करेंगे। किन्तु वह प्रसेनजित् द्वारा घृणापूर्वक वहां से भगा दिया गया।
7. ब्राह्मण और भगवान् बुद्ध
(i)
- एक बार जब तथागत भिक्षुओं के एक विशाल संघ के साथ कोशल-जनपद में
चारिका कर रहे थे, वे थून नामक एक ब्राह्मण गाँव में पहुँचे। 2. थून के ब्राह्मण गृहस्थों ने समाचार सुना, ‘‘लोगों का कहना है कि श्रमण गौतम
हमारे गाँव के खेतों तक आ पहुँचे हैं।’’