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- तब स्त्रियाँ अपने काम में जुट गईं और राजकुमार को घेरकर ऐसे चलने लगीं,
जैसे हिमवत के जंगल में हथिनी-समूह के बीच गजराज चलता हो।
- स्त्रियों के बीच सुन्दर उपवन में राजकुमार ठीक वैसे ही सुशोभित हो रहा था,
जैसे दिव्य उपवन में सूर्य अप्सराओं के बीच चमकता है।
- वहाँ उनमें से कुछ ने कामातिरेक से अपने पुष्ट और कठोर उरोजों को दबाकर
उसके मनोभाव को उत्तेजित किया।
- कुछ अन्य ने लड़खड़ाने का बहाना करते हुए उसे जोर से आलिंगनबद्ध कर
लिया और अपने कंधों और लता सदृश बाहों के सहारे अपना बोझ भी उस
पर डाल दिया।
- कुछ अन्य ने मादक सुरा की गंध और ताम्रवर्णी लाल होठों वाले मुँह से उसके
कान में फुसफुसाया-‘‘मेरी रहस्यपूर्ण बात सुनो।’’
- कुछ जो इत्र विलेप से भींजी थीं, उसके हाथ पकड़कर उत्सुकतापूर्वक उसे
आज्ञा देने की मुद्रा में कहा-‘‘यहाँ मेरी आराधना करो।’’
- एक अपने नीले वस्त्र में नशे से लड़खड़ाने का बहाना कर जान-बूझकर अपनी
जीभ बाहर निकालकर खड़ी हो गई, जैसे रात में बिजली कौंध रही हो।
- कुछ सुनहरे घुंघरुओं की आवाज करती हुईं अर्ध-आच्छादित पतले वस्त्र से ढँके
शरीर को दिखाती हुई इधर-उधर घूम रही थीं।
- कुछ हाथ में आम के पेड़ की शाखा लेकर झुकी हुईं थीं और स्वर्ण-कलश
तुल्य जैसे अपने उरोजों को दिखा रहीं थीं।
- कुछ कमलनयनी हाथ में कमल लेकर, कमल शय्या से आकर कमलदेवी पद्मा
की तरह कमल मुख राजकुमार के बगल में खड़ी थी।
- कुछ ने उचित भाव-भंगिमाओं के साथ मधुर गीत गाये, ताकि संयत राजकुमार
उत्तेजित हो सके। वे अपनी नजरों द्वारा कह रही थीं-‘‘अरे! तुम किस भ्रम में
पड़े हो?’’
- अन्य ने अपने आयायुक्त मुखमंडल पर पूरी तरह से भौंहें तानकर राजकुमार की
मुख-मुद्रा की नकल, जैसे कि नायक की भूमिका निभा रही हो।ं
- एक अन्य, जिनके उरोज सुन्दर एवं पूर्ण विकसित थे, जिनके कानों की बालियां
हवा में झूम रही थीं, जोर से हंसी जैसे कह रहो हो, और बोली-‘‘यदि आप
पकड़ सकते हैं, तो पकड़ें।’’