10. राजकुमार को जीत पाने में स्त्रियां असफल - Page 48

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  1. तब स्त्रियाँ अपने काम में जुट गईं और राजकुमार को घेरकर ऐसे चलने लगीं,

जैसे हिमवत के जंगल में हथिनी-समूह के बीच गजराज चलता हो।

  1. स्त्रियों के बीच सुन्दर उपवन में राजकुमार ठीक वैसे ही सुशोभित हो रहा था,

जैसे दिव्य उपवन में सूर्य अप्सराओं के बीच चमकता है।

  1. वहाँ उनमें से कुछ ने कामातिरेक से अपने पुष्ट और कठोर उरोजों को दबाकर

उसके मनोभाव को उत्तेजित किया।

  1. कुछ अन्य ने लड़खड़ाने का बहाना करते हुए उसे जोर से आलिंगनबद्ध कर

लिया और अपने कंधों और लता सदृश बाहों के सहारे अपना बोझ भी उस

पर डाल दिया।

  1. कुछ अन्य ने मादक सुरा की गंध और ताम्रवर्णी लाल होठों वाले मुँह से उसके

कान में फुसफुसाया-‘‘मेरी रहस्यपूर्ण बात सुनो।’’

  1. कुछ जो इत्र विलेप से भींजी थीं, उसके हाथ पकड़कर उत्सुकतापूर्वक उसे

आज्ञा देने की मुद्रा में कहा-‘‘यहाँ मेरी आराधना करो।’’

  1. एक अपने नीले वस्त्र में नशे से लड़खड़ाने का बहाना कर जान-बूझकर अपनी

जीभ बाहर निकालकर खड़ी हो गई, जैसे रात में बिजली कौंध रही हो।

  1. कुछ सुनहरे घुंघरुओं की आवाज करती हुईं अर्ध-आच्छादित पतले वस्त्र से ढँके

शरीर को दिखाती हुई इधर-उधर घूम रही थीं।

  1. कुछ हाथ में आम के पेड़ की शाखा लेकर झुकी हुईं थीं और स्वर्ण-कलश

तुल्य जैसे अपने उरोजों को दिखा रहीं थीं।

  1. कुछ कमलनयनी हाथ में कमल लेकर, कमल शय्या से आकर कमलदेवी पद्मा

की तरह कमल मुख राजकुमार के बगल में खड़ी थी।

  1. कुछ ने उचित भाव-भंगिमाओं के साथ मधुर गीत गाये, ताकि संयत राजकुमार

उत्तेजित हो सके। वे अपनी नजरों द्वारा कह रही थीं-‘‘अरे! तुम किस भ्रम में

पड़े हो?’’

  1. अन्य ने अपने आयायुक्त मुखमंडल पर पूरी तरह से भौंहें तानकर राजकुमार की

मुख-मुद्रा की नकल, जैसे कि नायक की भूमिका निभा रही हो।ं

  1. एक अन्य, जिनके उरोज सुन्दर एवं पूर्ण विकसित थे, जिनके कानों की बालियां

हवा में झूम रही थीं, जोर से हंसी जैसे कह रहो हो, और बोली-‘‘यदि आप

पकड़ सकते हैं, तो पकड़ें।’’