10. राजकुमार को जीत पाने में स्त्रियां असफल - Page 49

20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. जब वह वहां से चलने को हुआ, तो कुछ ने उसे पुष्प-हारों द्वारा बाँधने की

कोशिश की और कुछ ने मधुर, किन्तु महावत के अंकुश के चुभने के समान

शब्दों से प्रहार किया।

  1. किसी ने उससे बात करने के लिए आम की शाखा को हाथ में पकड़ उससे

फूल लेकर वासना में लिप्त कहा-‘‘यह किसका फूल है?’’

  1. किसी ने आदमी की तरह चाल-ढाल बनाकर उससे कहा-‘‘तुम स्त्री द्वारा जीते

जा चुके हो, जाओ अब इस पृथ्वी को जीतो।’’

  1. फिर एक दूसरी आँखें मटकाती हुई, नील-कमल को सूँघती हुई अस्पष्ट स्वर

में राजकुमार को सम्बोधित करने लगी।

  1. ‘‘मेरे स्वामी! मधु की तरह सुगंध वाले फूलों से आच्छादित इस आम्रकुंज को

देखें, जहाँ कोकिल ऐसे गाती है, जैसे किसी स्वर्ण-पिंजर में कैद हो।’’

  1. ‘‘स्वामी! यहां आएं, इस अशोक वृक्ष को देखें, जो प्रेमियों के विरह को बढ़ाता

है, जहाँ मधुकर गूँजते हैं, जैसे वे आग द्वारा झुलसा दिए गए हों।’’

  1. ‘‘आइए! इस तिलक वृक्ष को देखें, जिस पर आम्र-शाखाएँ लिपटी हुई हैं। जैसे

स्वेत वस्त्र में कोई पीत वस्त्र वाली स्त्री किसी श्वेत वस्त्रधारी पुरुष से लिपटी

हो।’’

  1. ‘‘ताजा अंगूरी-रस की तरह चमकीले पुष्पित कुरबक वृक्ष को देखें, जो इस

प्रकार झुका हुआ है, जैसे यह स्त्रियों के नाखूनों की लाली द्वारा हुआ हो।’’

  1. ‘‘आइए, नवपल्लव से आच्छादित इस अशोक वृक्ष को देखें, वह ऐसे खड़ा है

मानो हमारे हाथों की सुन्दरता पर लज्जित हो।’’

  1. ‘‘इस झील को ही देखें जिसके तट पर सिंदवार उगी हुई है, मानो एक सुन्दर

स्त्री श्वेत वस्त्र में लेटी हुई हो।’’

  1. ‘‘महिलाओं की राजसी सामर्थ्य शक्ति को देखें, पानी में वह चकवी आगे-आगे

जाती है और उसका पति दास की भाँति उसका पीछा करता है।’’

  1. ‘‘आओ! और मतवाली कोयल के गीत सुनें। दूसरे कोयल बेफिक्र ऐसे गाती हैं

जैसे दूसरी उसका अनुकरण कर रहे हों।’’

  1. ‘‘अच्छा होता यदि सर्वदा अपनी बुद्धिमत्ता का मनन करने वाले चिन्तनशील

व्यक्ति के विचार की जगह वसन्त ऋतु में उत्पन्न पक्षियों का उन्माद भी आप

में होता।’’