7. ब्राह्मण और भगवान् बुद्ध - Page 481

452 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. यद्यपि पानी ले जाती हुई अन्य स्त्रियों ने उसको रोकने का प्रयास किया, अपनी

जान की चिन्ता न करते हुए उसने अपने निश्चय के अनुसार पानी का घड़ा

अपने सिर से उतारा, उसे कमर में एक ओर रखा, तथागत के समीप गयी,

और उन्हें जल दिया। उन्होंने अपने हाथ और पैर धोये और जल पिया।

  1. उसके ब्राह्मण स्वामी ने तथागत को उसके द्वारा जल देने के विषय में सुना तो

उसने कहा, ‘‘उसने गाँव का नियम तोड़ा है और मैं दोषी कहा जा रहा हूँ,’’

ऐसा क्रोध से जलते हुए तथा अपने दाँत पीसते हुए उसने उसे जमीन पर पटक

दिया और उसकी लात-घूसों से पिटाई की। उसके कारण वह मृत्यु को प्राप्त

हो गयी।

(ii)

  1. तब दोन ब्राह्मण तथागत के पास आया और उन्हें अभिवादन किया और अभिवादन

के शब्दों का पारम्परिक आदान-प्रदान करने के पश्चात् वह एक ओर बैठ गया।

इस प्रकार बैठे हुए दोन ब्राह्मण ने तथागत से कहाः

  1. ‘‘श्रमण गौतम! मैंने लोगों को ऐसा कहते हुए सुना है, कि श्रमण गौतम वृद्ध,

आयु प्राप्त, जीवन-पथ के अंतिम पड़ाव वाले, वयोवृद्ध ब्राह्मणों को अभिवादन

नहीं करते, न तो उनके स्वागत के लिये उठते हैं, और न ही उन्हें आसन प्रस्तुत

करते हैं।’’

  1. ‘‘श्रमण गौतम! क्या ऐसा ही है कि श्रमण गौतम इनमें से कोई भी बात नहीं

करते .... वृद्ध, आदरणीय ब्राह्मणों को सम्मान और आसन नहीं देते, यह ठीक

नहीं है, श्रमण गौतम!’’

  1. ‘‘दोन! क्या तुम अपने आप को ब्राह्मण समझते हो?’’

  2. ‘‘श्रमण गौतम! यदि किसी के भी विषय में, सही प्रकार से कहा जाना हो

तो यह कहा जाना चाहिये- ‘ब्राह्मण माता-पिता दोनों की ओर से सुजात है,

माता-पिता दोनों की ओर से सात पीढि़यों तक पवित्र होता है, जन्म की दृष्टि से

निर्विवाद और निर्दोष_ अध्यायी, वेदमन्त्रज्ञ, अक्षर और प्रभेदों सहित तीनों वेदों में

पारंगत, स्वर-विज्ञान में भी तथा इतिहास-पुराण का ज्ञाता, काव्य और व्याकरण

का आचार्य, महापुरुष लक्षणों के अध्ययन में निपुण, विश्व के पूर्वानुमान में

दक्ष’ ऐसा ही निश्चय मुझ में भी है, श्रमण गौतम! सही प्रकार से कहे जाने

पर यह बात कही जानी चाहिये_ क्योंकि मैं भी, श्रमण गौतम! इसी प्रकार जन्मा

हूँ, इसी प्रकार निपुण हूँ............।’’

  1. ‘‘दोन! जो पुराने मंत्र निर्माता, मंत्र रचयिता, मंत्रधर ब्राह्मण हैं, जिन्हें अपने