454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘और इन चारों ब्रह्म-विहारों में विहार कर, मृत्यु के पश्चात् शरीर के बिखर
जाने पर, ब्रह्म-लोक गामी होता है। दोन! इस प्रकार ब्राह्मण ब्रह्म-सदृश बनता
है।’’
‘‘और दोन! एक ब्राह्मण देव-सदृश्य कैसे बनता है?’’
‘‘दोन! एक ब्राह्मण का उदाहरण लो, जो समान जन्म और आचरण वाला हो,
वह अपनी जीविका खेती, इत्यादि से नहीं कमाता हो, बल्कि भिक्षाटन से कमाता
हो। ... वह शिक्षण के लिये आचार्य को दक्षिणा चुकाता हो। और अधम्म के
अनुसार नहीं, बल्कि धम्मानुसार एक पत्नी खोजता हो।’’
- ‘‘तो धम्म क्या है? वह किसी ऐसी ब्राह्मणी को ग्रहण नहीं करता, जो खरीदी-बेची
गयी हो, बल्कि केवल उसी ब्राह्मणी के साथ, जिसके हाथों पर जल डाला गया
हो, वह केवल उसी ब्राह्मणी के पास जाता है। किसी अन्त्यज, शिकारी, बाँस
का कारीगर, रथ-कार, या आदिवासी की लड़की के पास नहीं जाता। और न
ही बच्चे वाली स्त्री के पास और न दूध पिलाने वाली स्त्री के पास और न
ही उसके पास जाता है जो ऋतुनी न हो।
- ‘‘और दोन! वह ब्राह्मण बच्चे वाली स्त्री के पास किसलिए नहीं जाता है? यदि
वह जाये तो लड़का या लड़की का जन्म अपवित्र अवश्य हो जाएगा, इसलिये
वह नहीं जाता है। और वह दूध पिलाने वाली स्त्री के पास किसलिए नहीं
जाता? यदि वह जाएगा तो लड़का या लड़की का अवश्य ही अशुद्ध दूध-पान
हो जायेगा, इसलिये वह नहीं जाता।’’
- ‘‘और वह जो ऋतुनी नहीं है उसके पास किसलिए नहीं जाता? दोन! यदि वह
ब्राह्मण ऐसी स्त्री के पास जायेगा, जो ऋतुनी नहीं है, उसके लिए ब्राह्मणी कभी
भी भोग का, मनोरंजन का, आनन्द का साधन नहीं बन सकती। वह ब्राह्मणी
तो ब्राह्मण के लिये केवल सन्तान उत्पत्ति का एक साधन बनी रहती है।’’
- ‘‘और जब विवाहित अवस्था में उसने एक बच्चे को उत्पन्न कर लिया, वह
अपने बाल-दाढ़ी मुँडवाता और वह गृह-त्याग कर अनागरिक हो जाता है।’’
- ‘‘और इस प्रकार प्रव्रजित होकर, काम-भोगों की तृष्णाओं से विरक्त हो विचरता
है, वह प्रथम से चतुर्थ ध्यान तक में प्रवेश करता है और विचरण करता
है।’’
- ‘‘इन चारों ध्यानों को प्राप्त करने के उपरान्त, मृत्यु-पश्चात् शरीर के बिखर
जाने पर, वह देव-लोक में उत्पन्न होता है।’’
- ‘‘दोन! इस प्रकार एक ब्राह्मण देव-सदृश्य बन जाता है।’’