3. अहिंसा-सिद्धान्त की आलोचना - Page 490

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उच्चारण करता है, उसकी जिव्हा खींच ली जानी चाहिये, और संघ के उन

सदस्यों की पसलियाँ तोड़ दी जानी चाहियें?’’

  1. तब राजा उस स्थल पर गया जहाँ तथागत थे, और प्रणाम करने के उपरान्त

उसने उन्हें सारी बात बताई, जो कुछ घटित हुआ था।

  1. ‘‘तथागत! आप भलि-भाँति जानते हैं, कि ऐसे राजा भी हैं, जो धम्म के विरुद्ध

हैं। ये विरोधी राजा सदैव भिक्षुओं को मामूली से मामूली बातों के लिए भी कष्ट

देने को तैयार रहते हैं। यदि वे जान गए कि भिक्षु सिपाहियों को सेना का त्याग

करने और भिक्षु-संघ में सम्मिलित होने के लिये बहका रहे हैं तो उस सीमा

की कल्पना करना असम्भव है कि भिक्षुओं के प्रति वे क्या-क्या दुर्व्यवहार कर

सकते हैं। कृपया तथागत इस विपत्ति को रोकने के लिये आवश्यक कार्यवाही

करें।’’

  1. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘यह मेरी कभी मंशा नहीं रही कि सैनिकों को अहिंसा

की आड़ में या अहिंसा के नाम पर राजा और उनके राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्य

का परित्याग करने की अनुमति दी जाये।’’

  1. तद्नुसार तथागत ने राजकीय सेवा लोगों के लिए भिक्षु-संघ में प्रवेश के विरुद्ध

एक नियम बनाया और भिक्षुओं को उसकी उद्घोषणा करते हुए यह कहा, ‘‘हे

भिक्षुओ! जो राजकीय सेवा में हों, उसे प्रव्रज्या ग्रहण न कराओ। जो ऐसे व्यक्ति

को प्रव्रज्या प्रदान कराता है, वह एक दृष्कृत अपराध का दोषी होगा।’’

  1. एक दूसरे संदर्भ में भी महावीर के एक अनुयायी तथा सेना के सेनापति सिंह

ने अहिंसा के विषय में तथागत से प्रश्न किया था।

  1. सिंह ने पूछा, ‘‘तथागत के सिद्धान्त से सम्बन्धित एक सन्देह अब भी मेरे मन

में शेष है। तथागत सन्देह को दूर करने की अनुमति देंगे, जिससे कि मैं धम्म

को उसी रूप से समझ सकूँ, जिस प्रकार तथागत उसे प्रतिपादित करते हैं।’’

  1. तथागत द्वारा अपनी अनुमति देने पर, सिंह ने कहा, ‘‘हे तथागत! मैं एक सैनिक

हूँ और राजा द्वारा उनके कानून को लागू करने तथा उसके युद्ध लड़ने के लिये

नियुक्त किया गया है। क्या तथागत, जो सभी दुखियों के प्रति असीम दया और

करुणा की शिक्षा देते हैं, अपराधी को दण्ड देने की अनुमति देंगे? और इसके

आगे, क्या तथागत घोषित करते हैं कि अपने घरों, अपनी पत्नियों, अपने बच्चों,

और अपनी सम्पत्ति की सुरक्षा करने के लिए युद्ध करना गलत है? क्या तथागत

एक पूर्ण आत्म-समर्पण के सिद्धांत की शिक्षा देते हैं? जिससे कि मैं कुकर्मी

द्वारा कष्ट पाऊँ, जो वह करना चाहता है वह उसके समक्ष सम्पूर्ण समर्पण कर

दूँ, जो हिंसा द्वारा जो कुछ मेरा अपना उसे लेने की धमकी दे? क्या तथागत