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464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

बाँधा जाना सभी संसारी अनुत्तरदायी के लिये दुखद हैं।’’

  1. ‘‘संसार में दरिद्रता और कर्ज दुखद हैं।’’

  2. इस प्रकार बुद्ध की दुख की कल्पना भौतिक है।

(ii) अनित्यता को निराशा का कारण बताना

  1. इस दोषारोपण का एक अन्य आधार इस सिद्धान्त से उत्पन्न होता है कि प्रत्येक

वस्तु अनेक चीजों से संयुक्त है, वह अब अनित्य है।

  1. कोई भी इस सिद्धान्त की सत्यता पर प्रश्न नहीं करता है।

  2. प्रत्येक वस्तु अनित्य है, इसे सभी द्वारा स्वीकार किया गया है।

  3. यदि कोई सिद्धान्त सत्य है तो उसे अवश्य ही घोषित किया जाना चाहिये भले

ही वह कितना भी अप्रिय हो।

  1. किन्तु इससे एक निराशावादी परिणाम क्यों निकाला जाये?

  2. यदि जीवन लघु है, तो वह लघु है और किसी को भी उसके लिये उदास होने

की आवश्यकता नहीं है।

  1. यह तो केवल अपनी-अपनी व्याख्या करने का विषय है।

  2. बर्मियों की व्याख्या अत्यन्त भिन्न है।

  3. बर्मी लोग परिवार में मृत्यु की घटना को इस प्रकार मनाते हैं, जैसे वह आनन्द

की घटना रही हो।

  1. मृत्यु के दिन गृहस्थ एक सार्वजनिक भोज देता है और लोग नाचते हुए शव

को श्मशान-भूमि तक ले जाते हैं। कोई भी मृत्यु का शोक नहीं करता, क्योंकि

वह तो आने ही वाली थी।

  1. यदि अनित्यता निराशावादी है, तो यह केवल इसलिये है, क्योंकि नित्यता को

सत्य मान लिया गया था, यद्यपि यह एक असत्य है।

  1. इसलिये बुद्ध की देशना को निराशा फैलाने वाला कदापि नहीं कहा जा सकता

है।

(iii) क्या बौद्ध धम्म निराशावादी है?

  1. भगवान बुद्ध के धम्म पर निराशावादी होने का आरोप लगाया जाता रहा है।