भाग-IV मित्र और प्रशंसक - Page 496

चौथा भाग

मित्र और प्रशंसक

  1. धानन्जानी ब्राह्मणी की श्रद्धा

  2. विशाखा की दृढ़ श्रद्धा

  3. मल्लिका की निष्ठा

  4. एक गर्भवती माँ की तीव्र अभिलाषा

  5. केनिय द्वारा स्वागत

  6. प्रसेनजित् के द्वारा तथागत की प्रशंसा में