1. धानन्जानी ब्राह्मणी की श्रद्धा - Page 497

468 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

1. धानन्जानी ब्राह्मणी की श्रद्धा

  1. तथागत के अनेक मित्र और प्रशंसक थे। उनमें से एक धानन्जानी भी थी।
  2. वह एक भारद्वाज ब्राह्मण की पत्नी थी। उसका पति तथागत से घृणा करता था।

किन्तु धानन्जानी तथागत की अनुयायी थी। उसकी श्रद्धा उल्लेख करने योग्य

है।

  1. तथागत एक बार राजगृह के समीप वेलुवन विहार कलन्दक निवाप नामक स्थान

पर ठहरे हुए थे।

  1. उन्हीं दिनों भारद्वाज परिवार के एक ब्राह्मण की पत्नी, धानन्जानी ब्राह्मणी अपने

पति के साथ राजगृह में निवास करती थी।

  1. यद्यपि उसका पति बुद्ध का एक प्रबल विरोधी था, लेकिन धानन्जानी बुद्ध,

धम्म और संघ के प्रति धर्मोत्साही विश्वासी थी। उसे त्रिरत्न की प्रशंसा करने

की आदत थी। जब कभी वह इस प्रकार प्रशंसा करने लगती थी, तो उसका

पति अपने कान बन्द कर लिया करता था।

  1. उसने अपने अनेक साथी ब्राह्मणों को संध्या में दिए जाने वाले एक विशाल

भोज पर आमंत्रित किया, उसने अपनी पत्नी से आग्रह किया कि वह चाहे जो

करें, किन्तु बुद्ध की प्रशंसा करके उसके अतिथियों को अप्रसन्न न करे। 7. धानन्जानी ऐसा कोई वचन देने को तैयार न थी। उसके पति ने उसे अपनी

तलवार से केले के समान उसके टुकड़े कर देने की धमकी दी। वह स्वयं पीड़ा

सहन करने के लिये तैयार हो गई। इस प्रकार उसने अपनी वाणी की स्वतंत्रता

बचाये रखी और बुद्ध की प्रशंसा में पाँच सौ गाथाएँ कह सुनाईं, और बिना शर्त

आत्मसमर्पण कर दिया।

  1. भोजन पात्र तथा सुनहरी चम्मचें लगा दी गयी थीं और अतिथि भोजन के लिये

बैठ गये थे। अतिथियों को भोजन परोसते समय ही उसकी बलवती भावना ने

जोर मारा। भोजन के मध्य ही वह वेलुवनाराम अभिमुख हो गयी और त्रिरत्न

की प्रशंसा करने लग गयी।

  1. अपमानित अतिथि उठ खड़े हुए, एक नास्तिक की उपस्थिति से अपवित्र भोजन

को थूकते हुए वे वहां से विदा हुए और उसके भोज के चौपट हो जाने पर

पति ने उसे बहुत गालियाँ दीं।

  1. जब भारद्वाज को भोजन परोस रही थी, उसने समक्ष आकर त्रिरत्न की प्रशंसा

की। उस भगवान, अर्हन्त, सम्यक सम्बुद्ध को नमस्कार, जय धम्म-धम्म को