2. विशाखा की दृढ़ श्रद्धा - Page 499

470 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

2. विशाखा की दृढ़-श्रद्धा

  1. विशाखा अंग जनपद के भद्दिय नगर में जन्मी थी।

  2. उसके पिता धनन्जय थे और उसकी माता का नाम सुमना था।

  3. एक बार सेल ब्राह्मण के निमन्त्रण पर बुद्ध एक विशाल भिक्षु-संघ के साथ

भद्दिय गये थे। उस समय उसकी पोती विशाखा तब सात वर्ष की थी। 4. यद्यपि विशाखा सात वर्ष की थी, तो भी उसने अपने दादा मेण्डक से बुद्ध के

दर्शन करने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। मेण्डक ने उसे ऐसा करने की

अनुमति दे दी और उसे पाँच साथी, पाँच सौ दास और पाँच सौ रथ दिये,

जिससे कि वह बुद्ध के पास जा सके।

  1. उसने रथ को कुछ दूरी पर रोक दिया और पैदल बुद्ध के पास गयी थी।
  2. भगवान बुद्ध ने उसे धम्म का उपदेश दिया और वह उनकी गृहस्थ शिष्या

(उपासिका) बन गयी।

  1. अगले पखवाड़े के लिये मेण्डक ने बुद्ध और उनके अनुयायियों को प्रतिदिन

अपने घर में आमन्त्रित किया, जहाँ उसने उन्हें भोजन कराया। 8. बाद में प्रसेनजित् के निवेदन पर जब बिम्बिसार ने धनन्जय को कोसल में रहने

के लिये भेज दिया, तो विशाखा भी अपने माता-पिता के साथ गयी और साकेत

में रहने लगी।

  1. श्रीवास्ती का एक धनी नागरिक मिगार अपने पुत्र पुण्यवर्धन का विवाह करना

चाहता था। उसने एक सुयोग्य दुल्हन खोजने के लिये कुछ लोगों को भेजा था। 10. दुल्हन की खोज में निकला दल साकेत में आ पहुँचा था। उन्होंने एक त्यौहार

के दिन नहाने के लिये झील में अपने रास्ते जाती हुई विशाखा को देखा। 11. उसी समय बड़े जोर की वर्षा हुई। विशाखा की सखियाँ शरण के लिये भाग

खड़ी हुईं। किन्तु विशाखा नहीं भागी। वह अपनी सामान्य चाल से चलती हुई

उस जगह पर पहुँची जहाँ सन्देशवाहक थे।

  1. उन्होंने उससे पूछा कि क्यों वह शरण के लिये नहीं दौड़ी और इस प्रकार अपने

कपड़े नहीं बचाये। उसने उत्तर दिया कि उसके पास बहुत से कपड़े हैं, किन्तु

यदि वह भागती तो उसके अपने किसी अंग में चोट लग सकती थी, जिसे वह

बदल नहीं सकती थी। उसने कहा, ‘‘अविवाहित लड़कियाँ बिक्री के लिये रखी

वस्तुओं के समान होती हैं, उनकी शक्ल-सूरत ठीक होनी चाहिये।’’