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- ‘‘उसने अपने पति को इसके विषय में बता दिया, जिस पर उसने उसके दो
टुकड़े कर दिये और तब स्वयं अपनी स्व-हत्या कर ली थी, जिससे कि वे
दोनों एक साथ मर सकें।
- यह सब नली-ध्यान ब्राह्मण ने शब्दशः रानी को सूचित कर दिया था।
- रानी तब राजा के पास गयी और पूछा, ‘‘महाराज क्या आपको अपनी इकलौती
पुत्री, राजकुमारी वजिरा प्रिय है। हां, प्रिय है’’, राजा ने उत्तर दिया। 25. ‘‘यदि आपकी वजिरा को कुछ हो जाये, तो क्या आपको दुख होगा या नहीं? ‘यदि
उसको कुछ हो जायेगा, तो इससे मेरे जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।’’ 26. मल्लिका ने पूछा, ‘‘क्या आपको मैं प्रिय हूँ।’’ ‘हाँ’ प्रिय हो। 27. ‘‘यदि मुझे कुछ हो जाए तो क्या आपको दुःख होगा या नहीं?’’, ‘‘यदि तुमको
कुछ हो जायेगा, तो इससे मेरे जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।’’ 28. ‘‘स्वामी! क्या आपको काशी और कोशल के लोग प्रिय हैं’’ ‘हाँ’ राजा ने उत्तर
दिया। ‘यदि उनको कुछ हो जाये तो क्या आपको दुःख होगा या नहीं।’’ 29. ‘‘यदि उनको कुछ हो जायेगा, इससे बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा, यह अन्यथा कैसे
हो सकता है?’’
- ‘‘क्या तथागत ने इससे भिन्न कोई बात कहीं थी?’’ राजा ने पश्चाताप प्रकट
करते हुए कहा, ‘‘नहीं मल्लिका।’’
4. एक गर्भवती माँ की तीव्र अभिलाषा
- एक बार जब तथागत भग्ग-देश के सुंसुभार पर्वत पर भेसकलावन के मृगदाय
में ठहरे हुए थे। राजकुमार बोधि का पद्म नामक महल अभी बनकर पूरा ही
हुआ था, किन्तु उसमें अभी तक किसी श्रमण, ब्राह्मण या किसी अन्य व्यक्ति
का वास नहीं हुआ था।
- राजकुमार ने संजिक-पुत्र नामक ब्राह्मण युवक से कहा, ‘‘तथागत के पास जाओ
और मेरी ओर से अपना शीश उनके चरणों में नवाओ, उनका कुशल-समाचार
पूछो और उन्हें कल के लिये मेरे यहाँ अपने भिक्षु-संघ-सहित भोजन-ग्रहण
करने के लिये आमंत्रित करो।’’
- सन्देश तथागत तक पहुँचा दिया गया, उन्होंने उसे मौन रहकर स्वीकृति दे दी
और यथावत् राजकुमार को भी सूचित कर दिया गया।