478 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
5. केनिय द्वारा स्वागत
- आपण में एक सेल ब्राह्मण रहा करता था, जो तीनों वेदों में पारंगत था, व्याख्या
सहित कर्मकाण्डों का ज्ञाता था, शब्द-शास्त्र तथा शब्दों की व्युत्पत्ति था, तथा
पाँचवी विद्या के रूप में इतिहास-पुराणों से भिज्ञ था, वह व्याकरण जानता था,
तथा लोकायत-शास्त्र और महापुरुष लक्षणों में निपुण था, उसके पास तीन सौ
युवक ब्राह्मण थे, जिन्हें वह वेद मन्त्र सिखाता था।
- अग्नि-पूजक केनिक सेल ब्राह्मण का एक अनुयायी था। अपने तीन सौ शिष्यों
के साथ, सेल वहाँ गया और उसने सभी अग्नि-पूजकों को अपने विभिन्न कार्यों
में व्यस्त देखा और केनिय स्वयं भी अपना पृथक खाना बना रहा था। 3. यह देखने पर ब्राह्मण ने केनिय से कहा, ‘‘यह सब क्या है? क्या यहां विवाह-भोज
है? या यहाँ कोई महायज्ञ होने वाला है? या तुमने कल सब राजकर्मचारियों के
साथ राजा बिम्बिसार को भोजन के लिये आमंत्रित किया है?’’ 4. ‘‘सेल! यहाँ कोई विवाह-भोज नहीं है और न ही राजा अपने सब राज-कर्मचारियों
के साथ निमंत्रण पर आ रहा है। अपितु मैंने एक महायज्ञ का आयोजन किया
है। श्रमण गौतम, एक भिक्षाटन चारिका के दौरान, अपने भिक्षु-संघ में बारह
सौ पचास भिक्षुओं के साथ आपण में पधार चुके हैं।’’
- ‘‘इस श्रमण गौतम के बारे में यह कीर्ति-प्रतिष्ठा सुनी गई है कि वे अर्हत्
सम्यक् सम्बुद्ध माने जाते हैं।’’
- ‘‘वे ही हैं, जिन्हें मैंने कल के भोजन के लिये उनके भिक्षु-संघ सहित यहाँ
आमन्त्रित किया है। तैयार हो रहा यह भोजन उन्हीं के लिये है।’’ 7. ‘‘सेल ने पूछा, ‘‘केनिय! क्या तुम उन्हें सम्यक् सम्बुद्ध का श्रेय देते हो?’’ ‘‘हाँ,
मैं देता हूँ’’, केनिय ने उत्तर दिया।, ‘‘क्या तुम?’’, ‘‘हाँ, मैं देता हूँ।’’
6. प्रसेनजित् के द्वारा तथागत की प्रशंसा में
- एक बार तथागत श्रावस्ती के समीप अनाथपिण्डिक के जेतवनाराम में ठहरे हुए
थे।
- उस समय कोशल का राजा, प्रसेनजित्, अभी-अभी एक बनावटी युद्ध से लौटे
ही थे, जिसमें अपने उद्देश्य की पूर्ति करके वे विजयी हुए थे। और उद्यान में
पहुंच कर वे उस ओर मुड़ गये। जहाँ तक रथ-मार्ग जाता था वहां तक अपने
रथ में चढ़कर गये, तब उतर गये और उद्यान से होते हुए पैदल गये।’’