11. राजकुमार को प्रधानमंत्री द्वारा समझाना - Page 51

22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘शिष्टाचार ही स्त्रियों का मरहम है, शिष्टाचार ही उत्तम आभूषण है और

शिष्टाचार के बिना सौंदर्य ठीक वैसा ही है जैसे फूलों के बिना उपवन।’’

  1. ‘‘लेकिन मात्र शिष्टाचार का अकेले क्या उपयोग? उसे हृदय-भावना से सुमेलित

होना चाहिए। निस्संदेह, कठिनाई से प्राप्त होने वाली सांसारिक भोगों की वस्तुएँ

जब आपके हाथों में हैं, तो आप उनका अनादर न करें।’’

  1. ‘‘काम-सुख को सर्वोंत्तम मानकर ही पुराने जमाने में पुरंदर (इन्द्र) ने भी गौतम

मुनि की पत्नी अहिल्या का आलिंगन किया।’’

  1. ‘‘इसी प्रकार अगस्त्य ऋषि ने सोम की पत्नी रोहिणी के साथ रमण किया तथा

जैसा कि श्रुति के अनुसार लोपामुद्रा के साथ भी यही हुआ।’’

  1. ‘‘उतथ्य की पत्नी मरुत की पुत्री ममता के साथ महान ऋषि बृहस्पति ने संभोग

किया और भारद्वाज को जन्म दिया।’’

  1. ‘‘अर्ध्य अर्पण करती हुई बृहस्पति की पत्नी के साथ चन्द्रमा ने ग्रहण किया

और दिव्य बुध को जन्म दिया।’’

  1. ‘‘इसी प्रकार पुराने जमाने में रागातिरेक से पाराशर ऋषि ने यमुना तट पर

वरुण-पुत्र की पुत्री काली के साथ सहवास किया।’’

  1. ‘‘ऋषि वशिष्ठ ने वासना के वशीभूत होकर एक निम्न जाति की तिरस्कृत

महिला अक्षमाला के साथ सहवास किया और कपिंगलाद नामक पुत्र को जन्म

दिया।’’

  1. ‘‘और राजर्षि ययात ने अपने यौवन की जीवंतता समाप्त होने के बाद भी कैत्ररथ

वन में अप्सरा विश्वाकी के साथ मनोविनोद किया।’’

  1. ‘‘पत्नी के साथ संभोग मृत्यु का कारण होगा-यह जानते हुए भी कौरव नरेश

पाण्डु माद्री की सुन्दरता और सद्गुणों से प्रभावित होकर प्रेम सुख के वशीभूत

होकर सहवास किया।’’

  1. ‘‘इन जैसे महान् व्यक्तियों ने भी जब काम-सुख के लिए इन घृणित इच्छाओं

के अनुसार काम किया, तो प्रशंसनीय भोग-विलास में क्या दोष है?’’

  1. ‘‘यह सब होने पर भी आप जैसा सुन्दर और शक्तिशाली युवक भोग-विलास

का तिरस्कार करता है। जिस पर आपका अधिकार है और जिसके लिए पूरी

दुनिया लालायित रहती है।’’