22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘शिष्टाचार ही स्त्रियों का मरहम है, शिष्टाचार ही उत्तम आभूषण है और
शिष्टाचार के बिना सौंदर्य ठीक वैसा ही है जैसे फूलों के बिना उपवन।’’
- ‘‘लेकिन मात्र शिष्टाचार का अकेले क्या उपयोग? उसे हृदय-भावना से सुमेलित
होना चाहिए। निस्संदेह, कठिनाई से प्राप्त होने वाली सांसारिक भोगों की वस्तुएँ
जब आपके हाथों में हैं, तो आप उनका अनादर न करें।’’
- ‘‘काम-सुख को सर्वोंत्तम मानकर ही पुराने जमाने में पुरंदर (इन्द्र) ने भी गौतम
मुनि की पत्नी अहिल्या का आलिंगन किया।’’
- ‘‘इसी प्रकार अगस्त्य ऋषि ने सोम की पत्नी रोहिणी के साथ रमण किया तथा
जैसा कि श्रुति के अनुसार लोपामुद्रा के साथ भी यही हुआ।’’
- ‘‘उतथ्य की पत्नी मरुत की पुत्री ममता के साथ महान ऋषि बृहस्पति ने संभोग
किया और भारद्वाज को जन्म दिया।’’
- ‘‘अर्ध्य अर्पण करती हुई बृहस्पति की पत्नी के साथ चन्द्रमा ने ग्रहण किया
और दिव्य बुध को जन्म दिया।’’
- ‘‘इसी प्रकार पुराने जमाने में रागातिरेक से पाराशर ऋषि ने यमुना तट पर
वरुण-पुत्र की पुत्री काली के साथ सहवास किया।’’
- ‘‘ऋषि वशिष्ठ ने वासना के वशीभूत होकर एक निम्न जाति की तिरस्कृत
महिला अक्षमाला के साथ सहवास किया और कपिंगलाद नामक पुत्र को जन्म
दिया।’’
- ‘‘और राजर्षि ययात ने अपने यौवन की जीवंतता समाप्त होने के बाद भी कैत्ररथ
वन में अप्सरा विश्वाकी के साथ मनोविनोद किया।’’
- ‘‘पत्नी के साथ संभोग मृत्यु का कारण होगा-यह जानते हुए भी कौरव नरेश
पाण्डु माद्री की सुन्दरता और सद्गुणों से प्रभावित होकर प्रेम सुख के वशीभूत
होकर सहवास किया।’’
- ‘‘इन जैसे महान् व्यक्तियों ने भी जब काम-सुख के लिए इन घृणित इच्छाओं
के अनुसार काम किया, तो प्रशंसनीय भोग-विलास में क्या दोष है?’’
- ‘‘यह सब होने पर भी आप जैसा सुन्दर और शक्तिशाली युवक भोग-विलास
का तिरस्कार करता है। जिस पर आपका अधिकार है और जिसके लिए पूरी
दुनिया लालायित रहती है।’’