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हैं। हम उनके द्वारा यह कहे जाने पर उत्पीडि़त किये जाते थे, यह तुम्हारे लिये

उचित नहीं है। किन्तु अब जो हम करना चाहेंगे, वह करने में स्वतंत्र होंगे और

जो हम नहीं चाहेंगे, वह हमे नहीं करेंगे। क्या यह अच्छा नहीं है कि वे अब

नहीं रहे? क्यों रोते हो, क्यों विलाप करते हो? यह तो खुशी की बात है।’’

  1. तथागत कितने महान और कठोर अनुशासन को मानने वाले थे।

6 अंतिम संस्कार

  1. तब कुसीनारा के मल्लों ने भदन्त आनन्द से कहा, ‘‘तथागत के शरीर के प्रति

क्या करणीय है?’’

  1. आनन्द ने उत्तर दिया, ‘‘जिस प्रकार लोग राजाओं एवं महाराजाओं की दाह-क्रिया

करते हैं, वैसे ही तथागत की होनी चाहिए।’’

  1. ‘‘राजाओं और महाराजाओं के मृत शरीर के साथ क्या करणीय व्यवहार होता

है?’’

  1. आनन्द ने उन्हें बताया, ‘‘राजाओं और महाराजाओं के शरीर को एक नये वस्त्र

में लपेटा जाता है। जब यह हो जाता है, तो उसे रुई-ऊन से लपेटा जाता है

इसके बाद उसे एक नये वस्त्र में लपेटा जाता है और यह क्रम तब तक चलता

रहता है, जब तक कि वे शरीर को दोनों प्रकार की परतों से पाँच सौ बार नहीं

लपेट देते, तब वे शरीर को लोहे के एक तेल भरे पात्र में रख देते हैं और

उसे एक अन्य लोहे के तेल भरे पात्र से ढक देते है। तब वे सभी प्रकार की

सामग्रियों से एक चिता का निर्माण करते हैं। यही वह तरीका है, जिस प्रकार

वे राजाओं और महाराजाओं के शरीर का अंतिम संस्कार होता है।’’ 5. ‘‘ऐसा ही होगा’’ मल्लों ने कहा।

  1. तब कुसीनारा के मल्लों ने कहा, ‘‘तथागत के शरीर का अन्तिम संस्कार करने

के लिये आज पर्याप्त विलम्ब हो चुका है। आओ अब हम इसे कल करें।’’ 7. तब कुसीनारा के मल्लों ने अपने सहायकों को आदेश दिये, यह कहते हुए,

‘‘तथागत की अन्त्येष्टि के लिये तैयारी करो और सुगंध, फूल-मालाओं और

कुसीनारा के बाजे वालों को एकत्रित करो।’’

  1. किन्तु तथागत के शरीर को नृत्य, संगीत, फूल-मालाओं द्वारा आदर, सत्कार,

गौरव और ऋद्धाजंलि देते हुए, और कपड़ों के चन्देवे बनाते हुए तथा उन पर

लटकाने के लिये फूलों की मालायें गूंथते हुए, उन्होंने दूसरा दिन भी व्यतीत

कर दिया, और अब तीसरा दिन, चौथा दिन, पाँचवा दिन और छठा दिन भी

व्यतीत कर दिया।