7. अस्थियों के लिए संघर्ष - Page 535

506 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. तब सातवें दिन कुसीनारा के मल्लों ने सोचा, ‘‘आओ! आज तथागत के शरीर

को ले चलें और अन्तिम संस्कार करें।’’

  1. और तत्पश्चात् मल्लों के आठ सरदारों ने अपने सिर से स्नान किया और तथागत

की अर्थी को कन्धा देने के उद्देश्य से नये वस्त्रों को पहना कर तैयार किया। 11. वे मृत-शरीर को मुकुट-बंधन नामक मल्लों के चैत्य तक ले गये, जो नगर के

पूर्व में था और वहाँ उन्होंने तथागत के शरीर को रख कर उसे अग्नि के सुपुर्द

कर दिया।

  1. कुछ समय पश्चात् तथागत का पार्थिव शरीर राख में परिवर्तित हो गया।

7. अस्थियों के लिए संघर्ष

  1. तथागत का शरीर अग्नि द्वारा भस्म हो जाने के उपरान्त कुसीनारा के मल्लों

ने तथागत की चिता की राख और अस्थियों को एकत्रित कर लिया और उन्हें

अपने सन्थागार में रख कर उन्हें भालों की जाली तथा तीरों के परकोटे से घेर

दिया। और उन पर धनुधारियों का पहरा बैठा दिया किसी के द्वारा उन्हें या

उनमें से एक अंश को चुरा न सके।

  1. सात दिन तक मल्लों ने उन्हें नृत्य, गीत, संगीत, फूल-मालाओं तथा सुगंधिनों

द्वारा आदर, सत्कार, और गौरव प्रदर्शित किया और उनकी पूजा की। 3. जब मगध के राजा अजातशत्रु ने समाचार सुना कि तथागत का कुसीनारा में

महापरिनिर्वाण हो गया।

  1. तब उन्होंने तथागत के अस्थि-अवशेषों में से एक अंश देने के निवेदन के साथ

मल्लों के पास एक दूत भेजा।

  1. इसी प्रकार वैशाली के लिच्छवियों, कपिलवस्तु के शाक्यों, अल्लकप्प के

बुल्लियों, रामगाम के कोलियों तथा पावा के मल्लों के दूत आये। 6. अस्थि-अवशेषों का दावा करने वालों में वेट्ठद्वीप का एक ब्राह्मण भी था। 7. जब उन्होंने इन दावों को सुना, तो कुसीनारा के मल्लों ने कहा, ‘‘तथागत का

महापरिनिर्वाण हमारे जनपद में हुआ है। हम तथागत के अस्थि-अवशेषों का

कोई भी अंश नहीं देंगे। उन पर हमारा अधिकार है।’’

  1. यह देख कर स्थिति तनावपूर्ण है, द्रोण नामक एक ब्राह्मण ने मध्यस्थता की

ओर कहा, ‘‘कृपया मेरे दो शब्द सुनो।’’

  1. द्रोण ने कहा, ‘‘भगवान् बुद्ध ने शान्ति व सहिष्णुता की शिक्षा दी थी, यह

अशोभनीय होगा कि उनके अस्थित् अवशेषों के विभाजन के लिये, जो प्राणियों

में सर्वश्रेष्ठ थे, संघर्ष हो तथा मार-काट व युद्ध हो।’’