(ii) किसा-गौतमी को सांत्वना - Page 547

518 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘मैं समझ गयी भगवान! यह भली-भाति समझा दिया गया है।’’
  2. अंत में तथागत ने कहा, ‘‘तो अब फिर शोक मत करो।’’

(ii)

किसा-गौतमी को सांत्वना

  1. किस गौतमी का विवाह श्रावस्ती के एक व्यापारी के पुत्र के साथ हुआ था।
  2. विवाह के उपरान्त उसने शीघ्र ही एक पुत्र को जन्म दिया था।
  3. दुर्भाग्य से चल पाने के योग्य होने से पहले ही उसके पुत्र को सर्प ने दंश

लिया और वह मर गया।

  1. वह विश्वास ही नहीं कर पा रही थी कि उसका पुत्र वास्तव में मर गया है,

क्योंकि उसने इससे पहले कभी ‘मृत्यु’ को देखा ही नहीं था। 5. सर्प-दंश से बना छोटा सा लाल दाग, ऐसा प्रतीत होता कि वह बच्चे की मृत्यु

का कारण भी हो सकता है।

  1. अतः उसने अपने मृत बच्चे को उठाकर पागलों जैसी मनोस्थिति में एक घर

से दूसरे घर घूमना शुरू कर दिया था कि लोगों ने यह विश्वास करना प्रारम्भ

कर दिया कि वह पागल हो गयी है।

  1. अन्ततोगत्वा एक वृद्ध व्यक्ति ने उसे श्रमण गौतम के पास जाने और उनकी

सहायता लेने की सलाह दी, जो उस समय श्रावस्ती में ही थे। 8. अतः वह तथागत के पास आयी और उसने अपने मृत बच्चे के लिये कुछ दवा

माँगी।

  1. तथागत ने उसकी दुख-गाथा और उसका विलाप सुना।

  2. तब तथागत ने उससे कहा, ‘‘नगर में जाओ और किसी भी ऐसे घर से जहाँ

पर कोई मरा न हो, कुछ सरसों के दाने ले आओ और उनकी सहायता से मैं

तुम्हारे बच्चे को पुनर्जीवित कर दूंगा।’’

  1. उसने सोचा यह बहुत सरल है और अपने बच्चे की मृत-देह के साथ उसने

नगर में प्रवेश किया। किन्तु शीघ्र ही उसने पाया कि वह असफल हो गयी,

क्योंकि जिस किसी घर में वह गयी थी, वहाँ किसी न किसी सदस्य की मृत्यु

हो चुकी थी।

  1. जैसा कि एक गृहस्थ ने उससे कहा, ‘‘जो जीवित हैं, वे थोड़े हैं और जो मर