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गए हैं वे अधिक हैं।’’

  1. अतः वह निराशा पूर्ण और खाली हाथ तथागत के पास लौट आई।
  2. तथागत ने तब उससे पूछा, ‘‘क्या उसने अभी भी यह नहीं समझा कि मृत्यु

सभी के लिये सामान्य बात है? क्या वह अब भी दुःखी होगी जैसे केवल उसी

के साथ यह अप्रिय घटना घटी है।’’

  1. वह तब वहाँ से यह कहते हुए चली गई कि ‘‘सभी कुछ अनित्य है_ यही

नियम है और उसने बच्चे का दाह-संस्कार कर दिया।’’

3. रोगियों के प्रति उनकी सेवा

  1. अब एक समय एक भिक्षु अतिसार से पीडि़त था और वह अपने ही मल-मूत्र

में पड़ा रहता था।

  1. स्थविर आनन्द को साथ लेकर तथागत अपनी चारिका करते हुए उस भिक्षु के

आवास पर पहुँचे।

  1. तथागत ने देखा कि वह भिक्षु अपने मल-मूत्र में ही पड़ा हुआ है और उसे

देख कर वे उसकी ओर गये और कहा, ‘‘भिक्षु! तुम्हें क्या रोग है?’’ 4. ‘‘मुझे अतिसार है, भगवान!’’

  1. ‘‘क्या कोई तुम्हारी देखभाल नहीं कर रहा है, भिक्षु?’’

  2. ‘‘नहीं, भगवान्।’’

  3. ‘‘भिक्षु! ऐसा क्यों है कि भिक्षु लोग तुम्हारी देखभाल नहीं करते।’’

  4. ‘‘भगवान्! मैं भिक्षुओं के लिये निरर्थक हूँ, इसलिए भिक्षु लोग मेरी देखभाल

नहीं करते हैं।’’

  1. तब तथागत ने स्थविर आनन्द से कहा, ‘‘तुम जाओ, आनन्द! और पानी ले

आओ। मैं इस भिक्षु को धोऊँगा।’’

  1. ‘‘हाँ, भगवान्’’ स्थविर आनन्द ने तथागत को उत्तर दिया। जब वे पानी ले

आये, तो तथागत ने पानी डाला, जबकि स्थविर आनन्द ने उस भिक्षु को पूरा

धो दिया। तब तथागत ने, उसे सिर की ओर से पकड़ा और स्थविर आनन्द ने

उसे पैर की ओर से पकड़ा, दोनों ने मिल कर उसे बिस्तर पर लिटा दिया। 11. तब तथागत ने इस सम्बन्ध में इस अवसर पर, भिक्षुओं के संघ को एक साथ

एकत्रित किया और भिक्षुओं से प्रश्न करते हुए यह कहा-