3. रोगियों के प्रति उनकी सेवा - Page 549

520 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘भिक्षुओ! क्या अमुक आवास में कोई बीमार भिक्षु है?’’

  2. ‘‘हाँ है, भगवान्।’’

  3. भगवान्, ‘‘उस भिक्षु को क्या रोग है?’’

  4. ‘‘भगवान्! उस भिक्षु को अतिसार है।’’

  5. भगवान् ने पूछा, ‘‘किन्तु, भिक्षुओ! क्या कोई उसकी देखभाल कर रहा है?’’

  6. ‘‘नहीं, भगवान्।’’

  7. भगवान् ने कहा, ‘‘क्यों नहीं? भिक्षु लोग उसकी देखभाल क्यों नहीं करते?’’

  8. ‘‘भगवान्! वह भिक्षु लोगों के लिये निरर्थक है। इसलिये भिक्षु लोग उसकी

देखभाल नहीं करते।’’

  1. भगवान् ने कहा, ‘‘भिक्षुओ, तुम्हारी देखभाल करने के लिये तुम्हारे कोई माता

और पिता नहीं हैं। यदि तुम एक दूसरे की देखभाल नहीं करोगे, तो दूसरा कौन

करेगा? मैं पूछता हूँ भिक्षुओ! जो रोगियों की सेवा-टहल करता है, वह मेरी

सेवा-टहल करता है।’’

  1. ‘‘यदि उसका एक उपाध्याय हो, उसके उपाध्याय को उसकी देखभाल करनी

चाहिये जब तब वह जीवित है, और उसके स्वास्थ्य-लाभ की प्रतीक्षा करनी

चाहिये। यदि उसके पास एक आचार्य या एक नेवासिक भिक्षु हो, एक शिष्य

या एक साथी भिक्षु हो तथा सहशिष्य हो, उसको उसकी देख-भाल करनी

चाहिए और उसके स्वास्थ्य-लाभ की प्रतीक्षा करनी चाहिए, यदि कोई उसकी

देखभाल नहीं करता है, तो यह एक अपराध होगा।’’

(ii)

  1. एक बार तथागत राजगृह के समीप महावन में कलन्दक निवाप में ठहरे हुए थे।
  2. इस अवसर पर स्थविर वक्कली रुग्ण, पीडि़त और एक दुःखद रोग से ग्रस्त थे

तथा कुम्हार के छप्पर में ठहरे हुए थे।

  1. तब स्थविर वक्कली ने अपने सहायकों को बुलाया और कहा, ‘‘यहाँ आओ,

मित्रो! तुम लोग तथागत के पास जाओ और मेरी ओर से तथागत के चरणों की

वन्दना करके, उनसे यह कहना, ‘‘भगवान्! भिक्षु वक्कली रुग्ण, पीडि़त और

एक दुःखद रोग से ग्रस्त है। वह तथागत के चरणों की वन्दना करता है।’’ और

तुम लोग इस प्रकार भी कहना,-‘‘भगवन!’’ यह अच्छा होगा, यदि उनके प्रति

करुणा के कारण, तथागत भिक्षु वक्कली से भेंट करने की कृपा करें।’’