4. असहनशीलों के प्रति सहनशीलता - Page 554

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  1. यक्ष को क्रोध आया बोला, ‘‘हे श्रमण! मैं तुमसे प्रश्न पूछूँगा, यदि तुम मेरे

प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकोगे, मैं तुम्हें पागल बना दूँगा या मैं तुम्हारे हृदय को

फाड़ डालूँगा या मैं तुम्हें पांवों से पकड़कर नदी के दूसरी ओर फेंक दूँगा।’’ 16. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘मित्र! मुझे संसार में कोई भी ऐसा नहीं दिखाई देता,

जो मुझे पागल बना दे या मेरे हृदय को फाड़ डाले या मुझे पांवों से पकड़ कर

नदी के उस पार फेंक सके। तथापि मित्र! तुम जो भी प्रश्न पूछना चाहते हो

पूछो।’’

  1. तब यक्ष आलवक ने तथागत से निम्नलिखित प्रश्न पूछे-

  2. ‘‘इस संसार में मनुष्य के लिये सर्वश्रेष्ठ धन क्या है? कौन-सा कुशल-कर्म

सुखदायक है, सभी रसों में मधुरतम रस कौन सा है? कौन-सा जीवन सर्वश्रेष्ठ

जीवन कहा जा सकता है?’’

  1. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘इस संसार में मनुष्य के लिये सर्वश्रेष्ठ धन श्रद्धा है।

भली-भांति पालन किया गया धम्म, सुखदायक है। सभी रसों में मधुरतम रस

सत्य है। प्रज्ञा से सम्पन्न जीवन सर्वश्रेष्ठ जीवन कहा जाता है।’’ 20. यक्ष आलवक ने पूछा, ‘‘आदमी बाढ़ (पुनर्जन्म) को कैसे पार कर सकता है?

आदमी सागर (भव) को कैसे लांघ सकता है? आदमी कैसे दुःख का अन्त

कर सकता है?’’

  1. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘आदमी श्रद्धा द्वारा बाढ़ को पार करता है। आदमी

अप्रमाद द्वारा (भव) सागर को पार करता है। कोई प्रयास से दुःख का अन्त

करता है। कोई प्रज्ञा द्वारा स्वयं को परिशुद्ध करता है।’’

  1. यक्ष आलवक ने पूछा, ‘‘किस प्रकार आदमी ज्ञान प्राप्त करता है? किस प्रकार

आदमी धन अर्जित करता है? किस प्रकार वह यश प्राप्त करता है? किस

प्रकार आदमी मित्र प्राप्त करता है? मृत्यु के पश्चात् इस लोक से दूसरे लोक

को जाते समय, किस प्रकार आदमी को अनुताप नहीं करता है?’’ 23. तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘निर्वाण प्राप्ति के लिये अर्हतों और धम्म में श्रद्धा रखने

से आज्ञाकारी होने से, अप्रमादी होने से सतर्क मनुष्य प्रज्ञा प्राप्त करता है।’’ 24. वह जो उचित करता है, वह जो दृढ़-निश्चयी है, वह जो जागृत है, वह धन

अर्जित करता है। जो देता है वह मित्र प्राप्त करता है।

  1. वह श्रद्धावान उपासक, जिसमें सत्यवादिता, सद्चरित्रता, धैर्य तथा उदारता पायी

जाती है, वह मृत्यु के पश्चात् पश्चाताप नहीं करता है।