14. संघ से मतभेद - Page 56

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  1. इसलिए शाक्यों के सेनापति ने कोलियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की चर्चा के लिए

संघ की एक सभा बुलाई।

  1. संघ के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए सेनापति ने कहा-‘‘हमारे लोगों पर

कोलियों ने आक्रमण किया और हमारे लोगों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना

पड़ा। कोलियों द्वारा इस प्रकार की आक्रामक कार्यवाही पहले भी हो चुकी है।

आज तक हमने उन्हें सहन किया है। लेकिन ऐसे काम नहीं चल सकता। इसे

रोकना ही चाहिए और रोकने का एक ही उपाय है-कोलियों के विरुद्ध युद्ध

की घोषणा। मेरा प्रस्ताव है कि संघ द्वारा कोलियों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा

कर दी जाए, जो इसका विरोध करना चाहें, वह बोलें।’’

  1. सिद्धार्थ गौतम अपने स्थान पर खड़े हुए और बोला-‘‘मैं इस प्रस्ताव का विरोध

करता हूँ। युद्ध से कभी किसी समस्या का हल नहीं होता। युद्ध छेड़ देने से

हमारे उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। इससे दूसरे युद्ध का बीजारोपण होगा। किसी

की हत्या करने वाले को कोई दूसरा हत्या करने वाला मिल जाता है। जीतने

वाले को दूसरा जीतने वाला मिल जाता है, लूटने वाले को दूसरा लूटने वाला

मिल जाता है।’’

  1. सिद्धार्थ गौतम ने अपना कहना जारी रखा-‘‘मुझे लगता है कि कोलियों के

विरुद्ध युद्ध छेड़ने में संघ को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले सावधानीपूर्वक

जाँच करनी चाहिए कि कौन पक्ष दोषी है। मैंने सुना है कि हमारे आदमियों ने

ज्यादती की है। यदि यह सत्य है, तो हम लोग भी दोष-मुक्त नहीं हैं।’’

  1. सेनापति ने उत्तर दिया-‘‘हाँ, यह ठीक है कि हमारे आदमियों ने ही पहल

की थी, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि पानी लेने की बारी पहले हमारी

थी।’’

  1. सिद्धार्थ गौतम ने कहा-‘‘इससे स्पष्ट है कि हम लोग भी पूर्णतः दोषमुक्त

नहीं है। इसलिए हम अपने में से दो आदमियों को चुनें और कोलियों से भी

कहा जाए कि वे भी दो आदमी चुनें। फिर चारों मिलकर एक पाँचवाँ आदमी

चुनें और पाँचों मिलकर विवाद का निपटारा करें।’’

  1. सिद्धार्थ गौतम ने जिस संशोधन का सुझाव दिया, उसे विधिवत समर्थन मिला।

लेकिन सेनापति ने इस सुझाव का यह कहते हुए विरोध किया-‘‘मैं पूर्णतः

आश्वस्त हूँ कि कोलियों का संकट उन्हें कठोर दण्ड दिए बिना समाप्त नहीं

हो सकता।’’