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- ‘‘एक निश्चित अविनाशी जड़ पदार्थ-समूह की कल्पना विज्ञान से विदा हुई।
इस शताब्दी में सभी का विश्वास है कि पदार्थ का प्रत्येक क्षण क्षय हो रहा
है।’’
‘‘भगवान् बुद्ध का अनित्यता का सिद्धान्त सुदृढ़ हो जाता है।’’
‘‘विज्ञान के द्वारा सिद्ध कर दिया गया है कि ब्रह्माण्ड का क्रम (चीजों का)
जुड़ना और बिखरना तथा पुनः जुड़ना है।’’
- ‘‘आधुनिक विज्ञान, के अनुसार अंतिम तत्त्व अनेक होकर एक भासित होने
वाला है।’’
- ‘‘आधुनिक विज्ञान भगवान् बुद्ध के अनित्यता और अनात्मवाद के सिद्धान्तों की
प्रतिध्वनि है।’’
- श्री ई. जी. टेलर अपनी ‘बुद्धिज़्य एण्ड मॉडर्न थॉट’ (बौद्ध धर्म और आधुनिक
विचार) में कहते हैं-
- ‘‘मनुष्य काफी समय से बाहरी सत्ता द्वारा शासित होता रहा है। यदि उसे
वास्तविक अर्थ में सभ्य बनना है, तो उसे स्वयं अपने नियमों द्वारा अनुशासित
होना अवश्य ही सीखना पड़ेगा। बौद्ध धम्म ही प्राचीनतम नैतिक-व्यवस्था है,
जिसमें मनुष्य को स्वयं अपने आप का अनुशासक बनने की शिक्षा दी गयी
है।’’
- ‘‘इसलिये इस प्रगतिशील संसार को बौद्ध धम्म की आवश्यकता है, ताकि वह
उससे सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त कर सके।’’
- ईसाई धर्म के यूनिटेरयन सम्प्रदाय के पादरी सन्त लेसली बोल्टन का कहना
है-
- ‘‘मैं बौद्ध धम्म के आध्यात्मिक मनोविज्ञान में इसका सबसे शक्तिशाली योगदान
मानता हूँ।’’
- ‘‘बौद्धों के समान यूनिटेरियन ईसाई भी धार्मिक ग्रन्थों (चर्च पुस्तक) या मतों
की बाह्य सत्ता को अस्वीकार करते हैं और स्वयं मनुष्य के भीतर मार्ग-दर्शक
प्रदीप देखते हैं।’’
- ‘‘यूनिटेरियन मत के अनुयायी ईसा मसीह और गौतम बुद्ध दोनों की ही
जीवन-शैली को श्रेष्ठ प्रतिपादक के रूप में देखते हैं।’’