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कहा-‘‘मैं वचन देता हूँ कि मुझे अनुमति मिले या न मिले मैं तुरंत ही देश
छोड़ दूँगा।’’
- संघ को लगा कि सिद्धार्थ का सुझाव इस विवाद से बाहर निकलने का सबसे
अच्छा रास्ता है। इसलिए संघ तैयार हो गया।
- सभा की कार्यवाही समाप्त कर संघ विसर्जित ही होने वाला था कि एक युवक
शाक्य अपने स्थान पर खड़ा हुआ और उसने कहा-‘‘मुझे कुछ महत्त्वपूर्ण बात
कहनी है।’’
- बोलने की अनुमति मिलने के बाद उसने कहा-‘‘मुझे संदेह नहीं है कि सिद्धार्थ
गौतम अपना वचन पूरा करेगा और तुरंत देश छोड़ देगा। फिर भी एक बात है
कि जिसके लिए मैं बहुत प्रसन्न नहीं हूँ।’’
- ‘‘अब जबकि सिद्धार्थ जल्दी ही आँखों से ओझल हो जाएगा, कोलियों के विरुद्ध
युद्ध छेड़ने की घोषणा का संघ का प्रस्ताव अभी से लागू हो जाएगा?’’
- ‘‘मैं चाहता हूँ कि संघ इस पर फिर से विचार करे। किसी भी तरह से
सिद्धार्थ गौतम को देश निकाले के बारे में कोसल-नरेश को मालूम हो ही
जाएगा। यदि शाक्य कोलियों के विरुद्ध तुरंत युद्ध की घोषणा करते हैं तो
कोसन-नरेश समझेगा कि सिद्धार्थ को देश इसलिए छोड़ना पड़ा, क्योंकि उसने
कोलियों के विरुद्ध युद्ध का विरोध किया। यह हम लोगों के लिए अच्छा
नहीं होगा।’’
- ‘‘इसलिए मेरा सुझाव है कि सिद्धार्थ गौतम के देश-निकाला और कोलियों के
विरुद्ध युद्ध की वास्तविक घोषणा के बीच एक अंतराल होना चाहिए, ताकि
कोसल-नरेश इन दोनों घटनाओं में संबंध स्थापित न कर सकें।’’
- संघ को लगा कि यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव है और औचित्यपूर्ण होने
के कारण संघ ने इसे स्वीकार कर लिया।
- इस प्रकार शाक्य-संघ की एक दुःखान्त सभा की समाप्ति हुई और अल्पमत
वालों, जिन्होंने युद्ध का विरोध किया था, लेकिन जिनमें बोलने का साहस नहीं
था, उन्होंने भी राहत की सांस ली कि किसी तरह से भी अत्यन्त भयावक
स्थिति से वे पार हो गए।