21. शोकग्रस्त परिवार - Page 71

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. कमल से भरे तालाब थे, फूलों से सुसज्जित वृक्ष थे, लेकिन नागरिकों के हृदय

प्रसन्नता शून्य थे।

  1. आँसुओं से डूबी निस्तेज आंखों के साथ जब दोनों ने धीरे से शहर में प्रवेश

किया, तो शहर ऐसे लग रहा था, जैसे अधंकार में नहाया हुआ हो।

  1. जब लोगों ने सुना कि वे शाक्य-जाति के गौरव के बिना दोनों अकेले थके हुए

आ गये हैं तो वे आँसू बहाने लगे।

  1. रोष में लोगों ने छन्न का पीछा किया। आँखों से आँसू बहाते हुए वे चिल्ला

रहे थे-‘‘राजा का बेटा, वंश और उसके साम्राज्य का गौरव कहाँ है?’’

  1. ‘‘यह शहर उसके बिना जंगल है, उसके सहित जंगल, शहर है_ उसके बिना

हमारे लिए शहर का कोई महत्त्व नहीं है।’’

  1. स्त्रियाँ कतार में खिड़कियों पर आ गईं। एक दूसरे को चिल्लाकर कहने

लगीं-‘‘राजकुमार लौट आया है,’’ लेकिन अश्व की पीठ खाली देखकर उन्होंने

अपनी खिड़कियाँ फिर से बन्द कर लीं और जोर-जोर से विलाप करने लगीं।

21. शोक ग्रस्त परिवार

  1. शुद्धोदन के परिवार के सदस्य उत्सुकतापूर्वक छन्न की वापसी का इंतजार कर

रहे थे। वे आशा लगाए बैठे थे कि हो सकता है कि छन्न को घर लौटाने के

लिए राजी कर ले।

  1. राजकीय अस्तबल में पहुँचते ही कंथक बड़े जोर से हिनहिनाया, इस प्रकार

उसने अपना दुःख राजमहल के लोगों के सामने व्यक्त कर दिया। 3. तब राजमहल के अंतःपुर के लोगों ने सोचा-‘‘चूँकि अवश्य कंथक हिनहिना

रहा है, इसलिए राजकुमार वापस आ गया होगा।’’

  1. और स्त्रियाँ जो शोक से मूर्छित सी बैठी हुई थीं, अब बड़ी प्रसन्न हो गईं।

उनकी आँखें राजकुमार को देखने के लिए इधर-उधर घूम रही थीं। वे पूरी

आशा से महल के बाहर आईं, लेकिन वहाँ बिना राजकुमार के कंथक को

देखकर निराशा हो गइंर्।

  1. आत्मसंयम छोड़कर गौतमी जोर से चीखीं-वह मूर्च्छित हो गईं और रोती हुई

चिल्लाई-

  1. ‘‘जो लम्बी बाँहों वाला हो, जिसकी शेर के समान चाल हो, जिसकी वृषभ

जैसी आँखें हों, जो स्वर्ण समान सुन्दर हो, जिसकी चौड़ी छाती हो, जिसका