2. राजा बिम्बिसार और उनका परामर्श - Page 76

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  1. राजगृह से कपिलवस्तु पैदल रास्ते से 400 (लगभग 645 कि.मी.) मील की

दूरी पर स्थित है।

  1. इतनी लम्बी यात्रा सिद्धार्थ गौतम ने पैदल तय की।

2. राजा बिम्बिसार और उसका परामर्श

  1. दूसरे दिन वह उठा, भिक्षापात्र लेकर भिक्षाटन हेतु नगर जाने की तैयारी की।

उसके चारों ओर एक विशाल भीड़ जमा हो गयी।

  1. मगध साम्राज्य के राजा श्रेणिय बिम्बिसार ने अपने राजमहल के बाहर लोगों की

बड़ी भीड़ को देखा और उसका कारण जानना चाहा। उसे एक दरबारी ने इस

प्रकार कारण बताया।

  1. ‘‘जिसके बारे में ब्राह्मणों ने भविष्यवाणी की थी कि वह या तो बुद्ध होगा या

चक्रवर्ती राजा-यह शाक्य-पुत्र है। वही शाक्य-राजा का यह पुत्र अब सन्यासी

बन गया है। यह वही है, जिसे सभी लोग निहार रहे हैं।’’

  1. यह सुनकर राजा ने उसके अर्थ पर विचार किया और तुरंत दरबारी को कहा-‘‘यह

पता करो कि वह किधर जा रहा है?’’ दरबारी आज्ञा पाकर राजकुमार के

पीछे-पीछे चल दिया।

  1. स्थिर दृष्टि, केवल एक गज की दूरी आगे देखते हुए शांत स्वर, नपे-तुले कदम

वाला, वह श्रेष्ठ परिव्राजक भिक्षाटन के लिये गया। उसकी इन्द्रियां और चित्त

पूर्ण रूप से संयत थे।

  1. भिक्षाटन में जो कुछ मिला, उसे पहाड़ के एक एकांत कोने में जाकर उसने

खाया, फिर पांडव पहाड़ी पर वह चला गया।

  1. लोध्र वृक्षों से भरे जंगल में जहाँ मयूरों के स्वर गूंज रहे थे, काषाय वस्त्र में

मानवता का सूर्य ऐसे चमक रहा था, जैसे पूर्वी पहाड़ों पर प्रातःकालीन सूर्य।

  1. उस राजकीय दरबारी ने ऐसा देखकर पूरी बातें राजा को बताइंर्। और राजा ने ऐसा

सुना, तो अपने कुछ थोड़े अनुयायियों के साथ भक्ति भाव से उस ओर प्रस्थान

किया।

  1. पर्वत के समान व्यक्तित्व वाला वह राजा उस पहाड़ी पर चढ़ा।

  2. वहाँ उसने शांत इन्द्रिय वाले गौतम को आसन पर बैठा देखा। वह ऐसा प्रतीत

हो रहा था कि मानो चलायमान पर्वत पर शिखर हो।