3. बिम्बिसार को गौतम का उत्तर - Page 80

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  1. ‘‘सांसारिक विषयों से बढ़कर इस संसार में कोई विपत्ति नहीं है। अविद्या के

कारण लोग इनमें लिप्त रहते हैं। एक बार विषयों से भयभीत हो जाने के बाद

कौन बुद्धिमान होगा, जो इस बुराई की इच्छा रखेगा?’’

  1. ‘‘समुद्र से घिरी सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लेने के बाद राजा लोग महासागर के

दूसरी ओर जीतना चाहते हैं। जिस प्रकार महासागर में गिरने वाले पानी से सागर

तृप्त नहीं होता। उसी प्रकार मानव-जाति की भी कभी विषयों से तृप्ति नहीं

होती।’’

  1. ‘‘स्वर्ग से स्वर्ण-वर्षा होने पर भी, महाद्वीपों को जीतने तथा शुक्र का आधा

राज्य पाने के बाद भी राजा मान्धाता सांसारिक विषय-वस्तुओं के लिए अतृप्त

ही रहा है।’’

  1. ‘‘जब इन्द्र ने वृत्र के भय से अपने को छिपा लिया था, उस समय देवताओं के

स्वर्ग के साम्राज्य का सुख भोगने और अपने घमंड में वशीभूत हो महान ऋषियों

द्वारा आपकी पालकी उठवाने के बाद भी नहुष संतुष्ट नहीं हुआ था।’’

  1. ‘‘इन भोग-विलास नामक शत्रुओं को कौन चाहेगा, जिन्होंने बड़े-बड़े ऋषियों

पर काबू पा लिया, जो दूसरे ही पुरुषार्थ में लगे थे, फटे-पुराने चिथड़े साँप

जैसी लम्बी-लम्बी जिनकी जटाएँ थीं।’’

  1. ‘‘जिन्होंने भोग-विलास और सांसारिक चीजों में लिप्त लोगों के दुःख सुने हैं,

अच्छी तरह आत्म-संयमित होकर इससे दूर रहने में ही उनकी भलाई है।’’

  1. ‘‘विषयायुक्त मनुष्यों के लिए भोग-विलास में सफलता भी एक विपत्ति समझी

जानी चाहिए, क्योंकि इच्छित भोग-विलास उसे मिल जाता है, तो वह मदहोश

हो जाता है और वह वही करता है, जिसे उसे नहीं करना चाहिए और जो

करना चाहिए, वह नहीं करता। फलतः वह आहत होकर एक भयानक अंत को

प्राप्त होता है।’’

  1. ‘‘ये भोग-विलास, जो परिश्रम से प्राप्त किए जाते हैं और सुरक्षित रखे जाते हैं,

बाद में धोखा देकर वहीं चले जाते हैं, जहाँ से आए थे। ये भोग विलास जो

कुछ समय के लिए ही उधार जैसे लिए जाते हैं, कोई आत्मसंयमी व्यक्ति, जो

बुद्धिमान है, इनमें कैसे आनन्द पा सकता है?’’

  1. ‘‘ये काम-विषय उल्का के समान हैं और जिन्हें पाने पर प्यास और बढ़ती है,

वैसे भोग-विलास में कोई आत्मसंयमी व्यक्ति कैसे संतुष्टि पाएगा?’’

  1. ‘‘ये भोग-विलास फेंके गए मांस के समान हैं, जो राजा और प्रजा दोनों में